Punjabi News

Qatar Energy: दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड LNG प्लांट पर ईरान का हमला, दागी मिसाइल, धू-धूकर जल उठा

46

इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने कतर के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र, ‘रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी’ पर भीषण मिसाइल हमला किया है, जिससे वहां की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है।

हमले की भयावहता और कतर की जवाबी कार्रवाई कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी ‘कतर-एनर्जी’ ने पुष्टि की है कि बुधवार को हुए इस हमले के बाद वहां भीषण आग लग गई थी। हालांकि, राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई और सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। लेकिन स्थिति तब और बिगड़ गई जब गुरुवार सुबह कतर-एनर्जी ने एक और बयान जारी कर बताया कि ईरान ने कई अन्य एलएनजी (LNG) केंद्रों को भी निशाना बनाया है, जिससे वहां बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।

इस उकसावे वाली कार्रवाई के जवाब में कतर ने कड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अताशे (attaches) सहित उनके पूरे स्टाफ को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर दिया है। कतर ने इन अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। कतर का मानना है कि ईरान की ये नीतियां पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में धकेल रही हैं।
बदले की आग में जल रहा है खाड़ी क्षेत्र ईरान ने यह हमला तब किया है जब उसने हाल ही में इजरायल द्वारा अपने ‘साउथ पार्स’ गैस फील्ड पर किए गए हमले का बदला लेने की धमकी दी थी। ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह केवल कतर ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब के जुबैल और सामरेफ रिफाइनरी के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल होसन गैस फील्ड को भी निशाना बनाएगा।

सऊदी अरब और UAE ने भी दावा किया है कि उन्होंने ईरान की ओर से दागी गई दर्जनों मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने रियाद की ओर आती 4 बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया, जबकि यूएई ने करीब 1,700 से अधिक ड्रोन और सैकड़ों मिसाइलों का सामना करने की बात कही है।

दुनिया पर क्या होगा असर? रास लफ्फान दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादन केंद्र है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं। विशेष रूप से यूरोपीय देश जैसे जर्मनी, और एशियाई देश जैसे भारत और जापान, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर निर्भर हैं, उन्हें भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि इसका सबसे बुरा असर ‘ग्लोबल साउथ’ के गरीब देशों पर पड़ेगा, जो महंगी कीमतों के कारण ऊर्जा संकट का शिकार हो जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस हमले के बाद कतर के अमीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बात की है। मैक्रों ने अपील की है कि नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से ऊर्जा और पानी की आपूर्ति वाले क्षेत्रों पर हमलों को तुरंत रोका जाना चाहिए ताकि आम जनता को इस सैन्य टकराव के बुरे परिणामों से बचाया जा सके। फिलहाल पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और दुनिया की नजरें अब सऊदी अरब में होने वाली मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक पर टिकी हैं।