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पंजाब पुलिस ने 39,000 से अधिक जन-जागरूकता बैठकों के माध्यम से ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान को हर गांव और हर वर्ग तक पहुंचाया

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39,000 से अधिक पुलिस-जन संवाद बैठकों ने भगवंत मान सरकार के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया

नशों के विरुद्ध लड़ाई केवल कानून लागू करने से नहीं जीती जा सकती; रोकथाम और जागरूकता के लिए समाज को बराबर का भागीदार बनना होगा: डीजीपी गौरव यादव

चंडीगढ़, 07 अगस्त, 2026: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस ने 1 मार्च, 2025 को अभियान शुरू होने के बाद से पूरे राज्य में 39,000 से अधिक जन-जागरूकता बैठकों का आयोजन किया है। यह व्यापक जन-संपर्क कार्यक्रम कानून लागू करने वाली एजेंसियों और आम जनता के बीच की दूरी को कम करते हुए पंजाब के नशा विरोधी अभियान का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।

पंजाब पुलिस नशा तस्करों और नशे के सौदागरों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है तथा इसके जन-जागरूकता कार्यक्रम ने लोगों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान को जन आंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस बात पर जोर देते हुए कि नशों के विरुद्ध लड़ाई पूरे समाज की साझी भागीदारी से ही जीती जा सकती है, पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “नशों विरुद्ध लड़ाई केवल कानून लागू करने से नहीं जीती जा सकती। पंजाब पुलिस जहां नशा तस्करों और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, वहीं स्थायी सफलता तभी संभव है, जब समाज रोकथाम और जागरूकता के प्रयासों में बराबर का भागीदार बने। हमारी जन-जागरूकता पहलें पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत कर रही हैं, नागरिकों को नशों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं तथा ऐसा वातावरण तैयार कर रही हैं, जिसमें लोग नशे की बुराई के विरुद्ध डटकर खड़े हों।”

5 अगस्त, 2026 तक पंजाब पुलिस ने स्कूलों, कॉलेजों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने तथा साथियों के दबाव का सामना करने संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से विद्यार्थियों के साथ 10,605 बैठकें की हैं। विद्यार्थियों को नशों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देने के लिए भी प्रेरित किया गया।

इसके अतिरिक्त 3,303 संपर्क बैठकों का आयोजन किया गया, जो मुख्य रूप से युवाओं पर केंद्रित थीं, क्योंकि वे नशे की लत के सबसे अधिक जोखिम वाले वर्गों में शामिल हैं। इन बैठकों के माध्यम से युवाओं को पुलिस अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं तथा स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिला। इन संवादों के दौरान नशों से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने के साथ-साथ नशा मुक्ति, पुनर्वास और रोकथाम संबंधी जानकारी भी दी गई।

इस जन-जागरूकता कार्यक्रम में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) तथा शहरी क्षेत्रों की वार्ड रक्षा समितियों के सदस्यों के साथ 25,328 से अधिक बैठकें आयोजित की गई हैं। यह पंजाब सरकार की प्रत्येक गांव और प्रत्येक वार्ड को नशा मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ये बैठकें अब पूरे राज्य में नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं। व्यापक स्तर पर पुलिस-जन संवाद आयोजित करने के लिए प्रतिदिन पांच जिलों का चयन किया जाता है। बड़े कार्यक्रमों की अध्यक्षता एसपी रैंक के अधिकारी करते हैं, जबकि स्थानीय स्तर की बैठकों का नेतृत्व स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) करते हैं, ताकि यह अभियान पंजाब के प्रत्येक कोने तक पहुंच सके। लोगों की भारी भागीदारी के कारण कई स्थानों पर प्रतिभागियों की सुविधा के लिए बैंक्वेट हॉल तथा बड़े सामुदायिक भवनों की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

वर्तमान समय में पंजाब में लगभग 13,000 ग्राम रक्षा समितियां (वीडीसी) सक्रिय हैं, जिनमें पूरे राज्य के लगभग 1.25 लाख स्वयंसेवक शामिल हैं। ये सदस्य पंजाब पुलिस के सहयोगी सूचना तंत्र के रूप में कार्य करने के साथ-साथ अपने-अपने गांवों और पंचायतों, विशेषकर युवाओं में, नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाकर समाज सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे हैं।

इन समितियों में गांवों के सम्मानित बुजुर्ग, सेवानिवृत्त सैनिक एवं पुलिस कर्मी, शिक्षक तथा समाज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हैं। पंजाब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कार्य करते हुए ये सदस्य न केवल नशों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी साझा कर कानून लागू करने के प्रयासों को मजबूत करते हैं, बल्कि नशे से प्रभावित लोगों को नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जन-जागरूकता कार्यक्रम के व्यापक दायरे और प्रभाव का उल्लेख करते हुए एडीजीपी, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, नीलाभ किशोर ने कहा, “पंजाब पुलिस इस अभियान को कक्षाओं और कॉलेजों से लेकर गांवों और शहरी वार्डों तक समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में सफल रही है। 39,000 से अधिक पुलिस-जन संवाद बैठकों ने संवाद, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के लिए एक मजबूत मंच तैयार किया है। यह निरंतर जन-संपर्क अभियान लोगों को नशों से संबंधित जानकारी साझा करने, कानून लागू करने की हमारी कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने तथा नशा मुक्त पंजाब के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित कर रहा है।”

इन सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पंजाब पुलिस समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी के साथ एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशा मुक्त पंजाब के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।