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पंजाब ने नशे के आदी 10,656 व्यक्तियों को उपचार एवं पुनर्वास के माध्यम से दिया दूसरा मौका

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– ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नशे के आदी व्यक्तियों के लिए पुनर्वास सुनिश्चित करने पर केंद्रित

– नशों के विरुद्ध लड़ाई का उद्देश्य केवल गिरफ्तारियाँ नहीं, बल्कि हर पीड़ित व्यक्ति को ठीक होने का अवसर देना भी है: डीजीपी गौरव यादव

चंडीगढ़:मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा मार्च 2025 में ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान शुरू करने के बाद नशे की लत वाले 10,656 व्यक्तियों को नार्काेटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम की धारा 64ए के तहत मुकदमे से छूट दी गई है। अवैध नशों के प्रभाव में होने या निजी उपयोग के लिए थोड़ी मात्रा में नशा रखने के लिए मुकदमा चलाने के बजाय उन्हें सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में उपचार और रिकवरी के लिए भर्ती किया गया है।

पंजाब पुलिस द्वारा 1 मार्च 2025 से 6 जुलाई 2026 के बीच एनडीपीएस अधिनियम के तहत 51,516 एफआईआर दर्ज की गईं और 67,519 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इसी अवधि में दस हजार से अधिक लोगों को मुकदमे से छूट दी गई, जो पंजाब पुलिस की दो-आयामी भूमिका-पहली, नशों की आपूर्ति को रोकना और दूसरी, उपचार की आवश्यकता वाले लोगों को सरकारी सुविधाओं से जोड़ना-को दर्शाता है।

राज्य की ऐसी सहानुभूतिपूर्ण पहुंच से यह स्पष्ट होता है कि नशे की चपेट में आए व्यक्तियों को सजा के बजाय उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता है। इससे यह भी साबित होता है कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए का उपयोग राज्य द्वारा उसी उद्देश्य के लिए किया जा रहा है जिसके लिए इसे बनाया गया था। यह धारा नशे के आदी व्यक्तियों को स्वेच्छा से नशा मुक्ति उपचार के लिए आगे आने पर मुकदमे से छूट देती है तथा अधिनियम के अन्य धाराओं के तहत निर्धारित सजा से बचने की अनुमति भी देती है।

चिकित्सा विशेषज्ञ प्रत्येक व्यक्ति की जांच करते हैं और उसके लिए व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करते हैं, जिसमें डिटॉक्सीफिकेशन, मनोचिकित्सकीय देखभाल, काउंसलिंग, व्यवहारिक उपचार और रिलैप्स की रोकथाम शामिल होती है। इस कार्यक्रम की हालिया सफलता को ध्यान में रखते हुए पुलिस आने वाले दिनों में नशे के आदी अन्य व्यक्तियों को भी डी-एडिक्शन सेंटरों से जोड़ेगी।

इस बारे में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा, ‘नशों के विरुद्ध लड़ाई केवल नशा बेचने वालों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे में ग्रस्त हर व्यक्ति को पुनर्वास का उचित अवसर देना भी है। हम पुलिस बल के रूप में उन सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो सख्त कार्रवाई और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाकर राज्य को जल्द से जल्द नशे के कलंक से मुक्त कर सकते हैं, ताकि हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य बेहतर बन सके।’

पंजाब सरकार की नशा विरोधी रणनीति दो स्तंभों पर खड़ी है – नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और नशा पीड़ितों के प्रति एक सहानुभूतिपूर्ण एवं तथ्य-आधारित दृष्टिकोण। एक ओर पुलिस द्वारा तस्करों और इसे आगे बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है, जिसके चलते पंजाब में एनडीपीएस के तहत सबसे अधिक सजाएँ हुई हैं, वहीं साथ-साथ बराबर ध्यान नशे के आदियों की पहचान कर उनका उपचार कराने पर भी दिया जा रहा है। गिरफ्तार किए जाने वाले नशे के आदियों को स्वेच्छा से नशा छोड़ने और पुनर्वास उपचार लेने के लिए प्रोत्साहित करके नशे के चक्रव्यूह को तोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार ने हजारों लोगों को जेल भेजने के बजाय औपचारिक उपचार प्रणाली के अंतर्गत लाया है।

एंटी-नार्काेटिक्स टास्क फोर्स के एडीजीपी नीलभ किशोर ने कहा, ‘एक अपराधी और नशा पीड़ित के बीच की बारीक रेखा को पहचानकर हम उन लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने में सफल हो रहे हैं जो नशे की चपेट में हैं। इस प्रकार एक व्यक्ति जो भविष्य में अपराधी बन सकता है, को उचित समय पर उपचार प्रदान किया जाता है ताकि वह पुनः समाज का हिस्सा बन सके।’

नशा एक इलाज योग्य चिकित्सीय स्थिति है और इसमें फंसे लोगों एवं उनके परिवारों को डी-एडिक्शन (नशा मुक्ति उपचार) के लिए आगे आना चाहिए। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए के तहत छूट पाने वाले 10,656 नशा पीड़ितों ने पंजाब की उपचार-आधारित रणनीति पर ठोस विश्वास जताया है। यह पंजाब सरकार के उस दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है जो यह सुनिश्चित करता है कि जो लोग नशे की गिरफ्त में हैं उन्हें सहानुभूति के साथ दूसरा मौका दिया जाए – उन्हें सजा के बजाय पुनर्वास एवं उपचार के माध्यम से पुनः समाज का हिस्सा बनाया जाए।