मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास, केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों से एक जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका में सौरव दास की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि की जांच की मांग की गई है। याचिका में न्यायपालिका के खिलाफ कथित टिप्पणियों को लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले में दास, केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए और अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है।
यह जनहित याचिका तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के निवासी गणेश कुमार ने दायर की है। ‘गणेश कुमार बनाम क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी’ शीर्षक वाली इस याचिका में सौरव दास के नेपाल से कथित पूर्वजों के संबंधों पर सवाल उठाए गए हैं और उनकी नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने दास के कथित नेपाल कनेक्शन की जांच की मांग की
अपनी याचिका में, कुमार ने दावा किया कि दास का मूल कथित तौर पर नेपाल से जुड़ा है और तर्क दिया कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर यह आरोप साबित हो जाता है, तो दास को भारतीय सरकार और न्यायपालिका पर उस तरह से टिप्पणी करने का अधिकार नहीं होगा, जैसा कि उन्होंने कथित तौर पर किया है। याचिकाकर्ता ने दास पर न्यायपालिका के खिलाफ बार-बार अपमानजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया और कहा कि ऐसा व्यवहार संविधान का अपमान है।
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से दास का पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने की मांग की है, अगर जांच में यह सामने आता है कि वह विदेशी नागरिक हैं. याचिका में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को उनके एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है. साथ ही उन्हें न्यायपालिका के बारे में आगे कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणियां करने से रोकने की मांग की गई है.
कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि याचिका में बताए गए योगेश शर्मा नाम के व्यक्ति ने जानबूझकर जरूरी जानकारी छिपाई और धोखाधड़ी से भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए, जिनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट शामिल हैं। उन्होंने इन आरोपों की जांच की मांग की और अधिकारियों से अनुरोध किया कि अगर दास किसी गलत काम के दोषी पाए जाते हैं, तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द कर दिया जाए। ये दावे याचिका का हिस्सा हैं और अभी तक अदालत द्वारा साबित नहीं किए गए हैं।
ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक करने की मांग
याचिकाकर्ता ने दास की नागरिकता और पृष्ठभूमि की जांच की मांग करने के साथ-साथ, अदालत से इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार मंत्रालय को यह निर्देश देने का आग्रह किया है कि “सौरव दास” नाम से चल रहे ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट को ब्लॉक कर दिया जाए। कुमार ने अदालत से यह आदेश देने की भी मांग की है कि दास को न्यायपालिका और देश भर के जजों के खिलाफ मानहानिकारक, अपमानजनक, अश्लील, नीचा दिखाने वाले या धमकी भरे बयान देने से रोका जाए।
इस रोक के दायरे में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों के जजों के खिलाफ की गई टिप्पणियां आएंगी, जिनमें सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए दिए गए बयान भी शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि जब तक यह मामला लंबित है, तब तक दास को अपने दोस्तों, सहयोगियों, एजेंटों या प्रतिनिधियों के माध्यम से भी ऐसी टिप्पणियां करने से रोका जाए।
याचिकाकर्ता ने फंडिंग के स्रोतों की जांच की मांग की
इस जनहित याचिका (PIL) में दास को मिले फंड के कथित स्रोतों और उन खातों की जांच की भी मांग की गई है, जिनके जरिए यह पैसा आया। कुमार ने दलील दी कि अधिकारियों को इस बात की जांच करनी चाहिए कि दास ने कथित तौर पर भारतीय पहचान दस्तावेज कैसे हासिल किए, इस प्रक्रिया में किसने मदद की और उसे फंडिंग कहां से मिली। याचिका में उन्होंने कहा कि देशहित में इस मामले की गहराई से जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ न्यायपालिका के खिलाफ की गई टिप्पणियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पहचान दस्तावेज हासिल करने और वित्तीय मदद के स्रोतों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।





















