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GST on Petrol/Diesel: पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग, 10 दिन में तीसरी बार बढ़े दाम

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बिजनेस डेस्कः सरकारी तेल कंपनियों द्वारा 10 दिनों में तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाने के बाद अब इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने की मांग तेज हो गई है। व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल और डीजल पर एक समान टैक्स व्यवस्था लागू करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा समय में पेट्रोल पर करीब 42% और डीजल पर लगभग 32% टैक्स लगाया जा रहा है, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।

पेट्रोल-डीजल पर लग रहे भारी टैक्स
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि अगर हम दिल्ली की बात करें तो 22 मई तक के आंकड़ों के अनुसार पेट्रोल का वास्तविक मूल्य 66.29 रुपए था, इस पर एक्साइज ड्यूटी 11.90 रुपए और VAT 16.03 रुपए लगता है, जबकि डीलर का मार्जिन 4.42 रुपए था। डीजल का वास्तविक मूल्य 67.36 रुपए, एक्साइज ड्यूटी 7.80 रुपए और VAT 13.39 रुपए था, जबकि डीलर मार्जिन 3.03 रुपए था।
20% तक कम हो सकते हैं दाम
गोयल के मुताबिक, यदि पेट्रोल और डीजल को 18% या 28% जीएसटी स्लैब में शामिल किया जाए तो ईंधन की कीमतों में 15-20% तक कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग वैट दरों के कारण कहीं पेट्रोल महंगा तो कहीं सस्ता मिल रहा है।

उदाहरण के तौर पर तेलंगाना में सबसे ज्यादा वैट होने से पेट्रोल सबसे महंगा है, जबकि अंडमान-निकोबार में सबसे कम वैट के कारण तेल सस्ता मिलता है। संगठन ने “वन नेशन, वन टैक्स” की तर्ज पर पूरे देश में एक समान टैक्स व्यवस्था लागू करने की मांग की है।