बिजनेस डेस्कः सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद अप्रैल में भारत का सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि चांदी का आयात भी 157.16 प्रतिशत बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। हालांकि सरकार द्वारा 13 मई से सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद आने वाले महीनों में इनके आयात में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात मूल्य के लिहाज से 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर रहा, जबकि मात्रा के आधार पर यह 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रह गया। वहीं, चांदी का आयात पिछले वित्त वर्ष में करीब 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर पहुंच गया और इसकी मात्रा 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रही।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयात शुल्क बढ़ने से उपभोग आधारित मांग कमजोर पड़ सकती है, जिससे सोने और चांदी के आयात में कमी आ सकती है। हालांकि, चांदी का औद्योगिक उपयोग अधिक होने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेाकृत कम रहने की संभावना है। उन्होंने भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के तहत रियायती शुल्क पर सोने के आयात को लेकर स्पष्ट किया कि इसका देश के कुल स्वर्ण आयात पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। 2025-26 में इस व्यवस्था के तहत केवल लगभग आठ टन सोने के आयात की अनुमति दी गई थी, जबकि वास्तविक आयात करीब एक टन ही रहा।
भारत के कुल स्वर्ण आयात में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है, जबकि यूएई की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और दक्षिण अफ्रीका की करीब 10 प्रतिशत है। अप्रैल में स्विट्जरलैंड से आयात 26.73 प्रतिशत बढ़कर 1.47 अरब डॉलर हो गया।
अप्रैल में सोने और चांदी के आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण देश का व्यापार घाटा बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया। राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत करीब 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत लगभग 2.53 लाख रुपए प्रति किलोग्राम रही। भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है और यहां सोने का आयात मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है।












