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Fuel Crisis: थोक और खुदरा कीमतों के अंतर ने बढ़ाई परेशानी, पेट्रोल पंपों पर बढ़ी भीड़

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बिजनेस डेस्कः डीजल की थोक और खुदरा कीमतों में लगभग 40-42 रुपए प्रति लीटर के बड़े अंतर के कारण देशभर में कई थोक खरीदार पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीदने पहुंच रहे हैं। इससे कुछ इलाकों में ईंधन की अस्थायी कमी और लंबी कतारों की स्थिति बन गई है। सरकार ने गुरुवार को बताया कि कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की मांग सामान्य से 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि पेट्रोल पंप आमतौर पर दो से तीन दिन का स्टॉक रखते हैं। अचानक मांग बढ़ने से कुछ स्थानों पर अस्थायी परेशानी हो सकती है लेकिन सरकार लगातार निगरानी कर रही है और जरूरत के अनुसार आपूर्ति दोबारा की जा रही है।

दरअसल, तेल विपणन कंपनियों ने 1 मई को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद थोक डीजल के दाम में 12 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। वहीं खुदरा डीजल की कीमतों में पिछले सप्ताह करीब 4 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई। दिल्ली में थोक डीजल लगभग 149 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि खुदरा कीमत 91.58 रुपए प्रति लीटर है।

सरकार ने कहा कि राज्य परिवहन निगम, फैक्ट्रियां, विनिर्माण इकाइयां और टेलीकॉम टॉवर ऑपरेटर जैसे बड़े उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के लिए सीधे थोक आपूर्ति केंद्रों से डीजल खरीदना चाहिए। इससे सामान्य पेट्रोल पंपों पर दबाव कम होगा।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं ताकि ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। हाल के दिनों में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गई हैं।

एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के बावजूद घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। भारत की रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर लगभग 47 हजार टन कर दिया है। पिछले तीन दिनों में 1.32 करोड़ सिलेंडर की बुकिंग के मुकाबले 1.34 करोड़ सिलेंडर वितरित किए गए हैं।