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ईज़ी रजिस्ट्री के 14 महीने सम्पूर्ण, पंजाब में संपत्ति पंजीकरण सेवाओं में आया बड़ा बदलाव

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राज्य ने लंबी कतारों और एजेंटों की जगह ऑनलाइन सेवाओं, दस्तावेजों की समयबद्ध जांच और डिजिटल पारदर्शिता के युग में कदम बढ़ाया: हरदीप सिंह मुंडियां

चंडीगढ़: पंजाब के राजस्व मंत्री स. हरदीप सिंह मुंडियां ने आज कहा कि संपत्ति पंजीकरण को तेज, सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों में ईज़ी रजिस्ट्री एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।

मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा जुलाई 2025 में मोहाली से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ईज़ी रजिस्ट्री की शुरुआत किए जाने के बाद नागरिकों को संपत्ति पंजीकरण संबंधी सेवाएं प्रदान करने के तौर-तरीकों में पूरी तरह बदलाव आया है। इस पहल के माध्यम से पंजीकरण प्रक्रिया, जो पहले बड़े स्तर पर कार्यालय-केंद्रित व्यवस्था पर निर्भर थी, को ऑनलाइन और समयबद्ध मॉडल में परिवर्तित किया गया है। इससे बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने और अधिकारियों से सीधे संपर्क की आवश्यकता कम हुई है।

स. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि मान सरकार का ध्यान संपत्ति पंजीकरण को ऐसी सेवा में बदलने पर केंद्रित रहा है, जहां नागरिक अधिक सुविधाजनक तरीके और विश्वास के साथ सेवाएं प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा, “ईज़ी रजिस्ट्री केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह एक प्रशासनिक सुधार है, जिसे नागरिकों की सुविधा, सम्मान और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।”

उन्होंने कहा कि ईज़ी रजिस्ट्री का प्रभाव नागरिकों से प्राप्त फीडबैक से स्पष्ट होता है। जिन जिलों और गांवों में यह पोर्टल कार्यशील है, वहां के 6,623 टोकन-धारक नागरिकों का दो चरणों में सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण-1.0 में 1,737 लाभार्थी तथा सर्वेक्षण-2.0 में 4,886 लाभार्थी शामिल हुए।

उन्होंने बताया कि दोनों सर्वेक्षणों के परिणामों में नई प्रणाली के प्रति लोगों की संतुष्टि सामने आई है। 93 प्रतिशत लाभार्थी नई पंजीकरण प्रक्रिया से संतुष्ट पाए गए। इसी प्रकार 93 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि उनकी रजिस्ट्री निर्धारित तिथि पर पूरी हुई। इसके अलावा 90 प्रतिशत लाभार्थियों को प्रक्रिया के किसी भी चरण में कोई समस्या नहीं आई, जबकि 93 प्रतिशत मामलों का बिना किसी आपत्ति के प्रारंभिक जांच के दौरान निपटारा किया गया। इसी प्रकार 94 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि उन्हें कोई अतिरिक्त भुगतान करने के लिए दबाव नहीं डाला गया।

लाभार्थियों के फीडबैक के अनुसार अधिकांश आवेदकों की रजिस्ट्री उनके निर्धारित दिन लगभग 35 मिनट में पूरी हुई। निर्धारित दिन और टोकन प्रणाली के कारण कार्यालयों में प्रतीक्षा समय कम हुआ, जबकि 48 घंटे के भीतर दस्तावेजों की जांच से बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता भी कम हुई है। स्थिति संबंधी व्हाट्सऐप अपडेट से आवेदकों की अपनी अर्जियों को ट्रैक करने के लिए एजेंटों पर निर्भरता और कम हुई है तथा अधिकांश मामलों में पंजीकृत डीड एक बार कार्यालय जाने पर ही प्राप्त की जा सकती है।

स. मुंडियां ने कहा कि ये आंकड़े पिछले 14 महीनों के दौरान ईज़ी रजिस्ट्री के माध्यम से आए बदलाव को दर्शाते हैं। फीडबैक से यह भी पता चलता है कि इन सुधारों से पंजीकरण प्रक्रिया की समयबद्धता और जनता के विश्वास, दोनों में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि ईज़ी रजिस्ट्री ने तकनीक को प्रशासनिक सुधारों के साथ जोड़कर संपत्ति पंजीकरण से जुड़े प्रमुख मुद्दों का समाधान करने का प्रयास किया है।

ऑनलाइन डीड तैयार करने और शुल्क भुगतान से लेकर प्रारंभिक जांच, पहले आओ-पहले पाओ (एफ.आई.एफ.ओ.) फाइल प्रोसेसिंग, डिजिटल फर्द जनरेशन, ई-केवाईसी सत्यापन, टोकन प्रबंधन और व्हाट्सऐप संचार तक, इस प्रणाली ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सार्वजनिक सेवाएं समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से प्रदान की जाएं।

राजस्व मंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था के तहत नागरिकों को उस अधिकार क्षेत्र से संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाना पड़ता था, जहां उनकी संपत्ति स्थित होती थी। ईज़ी रजिस्ट्री के माध्यम से जिले के भीतर किसी भी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण की अनुमति देकर इस बाधा को दूर कर दिया गया है।

स. मुंडियां ने कहा कि किसी भी कार्यालय में काम करवाने की सुविधा से किसी विशेष कार्यालय या अधिकारी पर नागरिकों की निर्भरता कम हुई है और उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुनने की अधिक स्वतंत्रता मिली है। इस सुधार से पक्षपात और अनावश्यक प्रभाव की स्थितियों को समाप्त करने में भी मदद मिली है।

पहले आओ-पहले पाओ (एफ.आई.एफ.ओ.) प्रणाली से क्रमबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित और अधिक पारदर्शिता

ईज़ी रजिस्ट्री के तहत फाइलों के निपटारे के लिए पहले आओ-पहले पाओ (एफ.आई.एफ.ओ.) प्रणाली शुरू की गई है। किसी विशेष फाइल पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय आवेदनों पर उसी क्रम में कार्रवाई की जाती है, जिस क्रम में वे प्राप्त होते हैं।

स. मुंडियां ने कहा कि इस सुधार से प्रक्रिया में समयबद्धता और निष्पक्षता आई है। अब नागरिकों को यह जानने के लिए किसी व्यक्तिगत प्रभाव का सहारा लेने या बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है कि उनकी फाइल पर कब कार्रवाई की जाएगी।

48 घंटे में दस्तावेजों की जांच से देरी पर रोक

ईज़ी रजिस्ट्री के तहत एक व्यवस्थित और समयबद्ध आपत्ति प्रणाली शुरू की गई है। आवेदक का मामला रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचने से पहले ही उससे संबंधित आपत्तियों का निपटारा कर दिया जाता है, जिससे निर्धारित समय पर कार्यालय आने के दौरान नागरिकों के समय की बचत होती है।

रजिस्ट्रार द्वारा आपत्ति उठाए जाने पर इस प्रणाली के माध्यम से 48 घंटे के भीतर जानकारी देना अनिवार्य है। ऐसी आपत्तियों की निगरानी डिप्टी कमिश्नर या उप-मंडल मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपत्तियां उचित हैं।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि स्पष्ट जांच समय-सीमा निर्धारित करने से नागरिकों को संपत्ति पंजीकरण के दौरान होने वाली बार-बार की परेशानी में काफी कमी आई है। 93 प्रतिशत मामलों का बिना किसी आपत्ति के जांच से पहले ही निपटारा किया गया है।

डीड ड्राफ्टिंग अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं

ईज़ी रजिस्ट्री ने सेल डीड तैयार करने के तरीके में भी बदलाव किया है। नागरिक अब तीन विकल्पों में से चयन कर सकते हैं—डू-इट-योरसेल्फ ऑनलाइन डीड ड्राफ्टिंग, समर्पित डीड सहायता काउंटरों पर सहायता अथवा सेवा सहायकों के माध्यम से निर्धारित दरों पर सेवाएं। इससे नियमित ड्राफ्टिंग आवश्यकताओं के लिए निजी डीड-राइटरों और वकीलों पर निर्भरता कम हुई है तथा नागरिकों को पंजीकरण प्रक्रिया पर अधिक नियंत्रण मिला है।

एक लेन-देन, 25 बैंक और तत्काल शुल्क गणना

उन्होंने कहा कि नई प्रणाली ने स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क के भुगतान को भी सुव्यवस्थित किया है। लागू शुल्क की तत्काल गणना की जाती है और नागरिक 25 बैंकों की एकीकृत प्रणाली का उपयोग करके एक ही लेन-देन के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं। स. मुंडियां ने बताया कि इस व्यवस्था से बैंकों के बार-बार अनावश्यक चक्कर लगाने की प्रथा समाप्त हुई है और शुल्क की गणना में अस्पष्टता कम हुई है। प्री-स्क्रूटिनी और सिंगल-विंडो भुगतान से रिफंड संबंधी अनुरोधों को कम करने में भी मदद मिली है।

व्हाट्सऐप अपडेट से नागरिकों को मिलती है जानकारी

ईज़ी रजिस्ट्री ने पंजीकरण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों पर स्वचालित व्हाट्सऐप संदेश भेजने की व्यवस्था शुरू की है। अब आवेदक एजेंटों पर निर्भर रहने या सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए बिना अपने मामले की प्रगति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रणाली ऑनलाइन शिकायतों तथा रिश्वत मांगने की शिकायत व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे दर्ज कराने की सुविधा भी प्रदान करती है। ऐसी शिकायतें सीधे डिप्टी कमिश्नर तक पहुंचती हैं।

राजस्व मंत्री ने कहा कि इस सीधे संचार माध्यम ने नागरिकों को सेवा प्रदान करने के साथ-साथ जवाबदेही को भी मजबूत किया है। लगभग 94 प्रतिशत आवेदकों ने बताया कि उन्हें कोई अतिरिक्त पैसा देने के लिए मजबूर नहीं किया गया।

डिजिटल फर्द अब स्वतः तैयार होती है

ईज़ी रजिस्ट्री के तहत एक बड़ा तकनीकी सुधार जमाबंदी पोर्टल का ईज़ी रजिस्ट्री पोर्टल के साथ एकीकरण है। इस एकीकरण से क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल फर्द स्वतः तैयार हो जाती है। आवेदकों को अब फर्द मैन्युअल रूप से अपलोड करने की आवश्यकता नहीं है। यह प्रणाली प्रमाणित और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध करवाती है, जिससे दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ या उनके फर्जी होने की संभावना काफी कम हो जाती है। इस व्यवस्था ने आवेदकों के लिए प्रोसेसिंग समय और अनावश्यक चक्करों को भी कम किया है।

सहमति-आधारित ई-केवाईसी से सुरक्षा हुई मजबूत

ईज़ी रजिस्ट्री ने सब-रजिस्ट्रार स्तर पर सहमति-आधारित इलेक्ट्रॉनिक के.वाई.सी. सत्यापन शुरू किया है। संबंधित पक्षों की सहमति से उनकी पहचान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सत्यापित की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि यह धोखाधड़ी अथवा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर होने वाली रजिस्ट्रियों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करता है कि पंजीकरण प्रक्रिया में भाग लेने वाले व्यक्ति सही और वास्तविक हैं।

एकीकृत टोकन प्रणाली ने कम किया प्रतीक्षा समय

स. मुंडियां ने कहा कि एकीकृत टोकन प्रबंधन प्रणाली उन नागरिकों को प्राथमिकता देती है, जिनके पास निर्धारित अपॉइंटमेंट और पूर्ण दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली ने पंजीकरण कार्यालयों में प्रतीक्षा समय कम करने में मदद की है और साथ ही शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के कार्यालयों में सेवाओं को अधिक एकरूप बनाया है।
लाभार्थियों के फीडबैक के अनुसार अधिकांश आवेदकों ने अपनी अपॉइंटमेंट वाले दिन लगभग 35 मिनट में अपनी रजिस्ट्री पूरी की। उन्होंने आगे बताया कि 93 प्रतिशत लाभार्थियों ने कहा कि उनकी रजिस्ट्री निर्धारित अपॉइंटमेंट पर पूरी हुई।

पंजीकरण कार्यालयों को नागरिक-केंद्रित बनाया

डिजिटल सुधारों के साथ-साथ नागरिकों को अधिक आरामदायक और सम्मानजनक अनुभव प्रदान करने के लिए पंजीकरण कार्यालयों को भी अपग्रेड किया गया है। व्यापक बदलाव के तहत आधुनिक वेटिंग एरिया, पेशेवर रिसेप्शन सुविधाएं और अधिक नागरिक-केंद्रित कार्यालयी वातावरण तैयार किया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में आने वाले नागरिकों के समग्र अनुभव को बेहतर बनाना भी है।

अब तक करीब 10 लाख दस्तावेज पंजीकृत

जुलाई 2025 में ईज़ी रजिस्ट्री प्रणाली की शुरुआत से लेकर 8 सितंबर 2026 तक पंजाब भर में कुल 9,87,425 दस्तावेज पंजीकृत किए गए हैं। यह पूरे राज्य में नागरिकों द्वारा नई पंजीकरण प्रणाली को बड़े स्तर पर अपनाए जाने को दर्शाता है।

ईज़ी रजिस्ट्री प्रणाली उदाहरणीय सुशासन मॉडल के रूप में उभरी

स. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि ईज़ी रजिस्ट्री के माध्यम से लाया गया बदलाव संपत्ति पंजीकरण से आगे बढ़कर नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप सार्वजनिक सेवाओं को पुनः डिजाइन करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है। इस पहल ने अनावश्यक कार्यालयी चक्करों को डिजिटल प्रक्रियाओं से कम किया है, जबकि डीड सहायता काउंटरों और सेवा सहायकों के माध्यम से आवश्यक मानवीय सहायता को भी बरकरार रखा गया है। निर्धारित समय-सीमाओं, डिजिटल रिकॉर्ड, सीधे संचार और शिकायत निवारण प्रणाली के साथ ईज़ी रजिस्ट्री ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे अन्य विभागों में भी लागू किया जा सकता है।

स. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि पंजाब सरकार तकनीक-आधारित शासन को और मजबूत करना जारी रखेगी, ताकि नागरिक न्यूनतम असुविधा और अधिकतम पारदर्शिता के साथ सरकारी सेवाओं तक पहुंच सकें।