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Black Money तो सुना होगा, पर क्या है Red और Pink मनी का राज? जानें अवैध कमाई के इन अलग-अलग रंगों का मतलब!

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नेशनल डेस्क। मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी कमाई की खबरों में आपने अक्सर ‘ब्लैक मनी’ (काला धन) का नाम सुना होगा खासकर नोटबंदी के दौरान इसकी खूब चर्चा हुई लेकिन क्या आपने कभी ‘रेड मनी’ (Red Money) और ‘पिंक मनी’ (Pink Money) के बारे में सुना है? अगर नहीं तो आइए आज हम आपको अवैध कमाई के इन अलग-अलग रंगों और उनके अंतर के बारे में बताते हैं।

क्या है ब्लैक मनी (काला धन)

सबसे पहले बात करते हैं ब्लैक मनी की जिसे हिंदी में काला धन भी कहते हैं। यह वह पैसा है जो अवैध तरीकों से कमाया जाता है और सरकार की नजरों से छिपाया जाता है। इस धन का स्रोत अक्सर टैक्स चोरी, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, रिश्वत या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियां होती हैं। ब्लैक मनी का लेन-देन अक्सर नकद में किया जाता है ताकि इसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। भारत में ब्लैक मनी को रोकने के लिए सरकार ने नोटबंदी, जीएसटी (GST) और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून जैसे कई कदम उठाए हैं।
क्या है रेड मनी (Red Money)

रेड मनी को भी ब्लैक मनी की तरह ही अवैध धन माना जाता है लेकिन इसे विशेष रूप से उन पैसों से जोड़ा जाता है जो आपराधिक गतिविधियों से कमाए जाते हैं। रेड मनी का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह समाज और अर्थव्यवस्था के लिए खतरे का प्रतीक है ठीक वैसे ही जैसे लाल रंग खतरे को दर्शाता है। यह धन न केवल अर्थव्यवस्था को कमजोर करता है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है क्योंकि इसका उपयोग अक्सर आतंकवादी गतिविधियों या संगठित अपराधों को वित्तपोषित करने में किया जाता है।
क्या है पिंक मनी (Pink Money)

पिंक मनी उस धन को कहते हैं जो अवैध नशीले पदार्थ (ड्रग्स) या अवैध जुआ जैसी गतिविधियों के माध्यम से कमाया गया हो। यह शब्द विशेष रूप से मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त आय को संदर्भित करता है। इस प्रकार की अवैध कमाई भी समाज पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालती है क्योंकि यह नशे और जुए की लत को बढ़ावा देती है जिससे सामाजिक और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इस प्रकार जहां ब्लैक मनी कर चोरी या भ्रष्टाचार से जुड़ी होती है वहीं रेड मनी व्यापक आपराधिक गतिविधियों से आती है और पिंक मनी विशेष रूप से ड्रग्स और जुए से प्राप्त धन को दर्शाती है। ये सभी प्रकार के धन अवैध होते हैं और किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने के लिए हानिकारक होते हैं।