नई दिल्ली : कर्नाटक की राजनीतिक में हलचल मचा देने वाला एक ऐतिहासिक फैसला सामने आया। एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को भाजपा नेता योगेश गौड़ा की 2016 में हुई हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बेंगलुरु स्थित जन प्रतिनिधि सभा की स्पेशल कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लंबी सुनवाई के बाद, विशेष अदालत के न्यायाधीश संतोष गजानन भट्ट ने आज दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनीं। इसके बाद उन्होंने सजा की मात्रा पर फैसला कल के लिए सुरक्षित रख लिया। अब फैसला सुना दिया गया है।
CBI की ओर से पैरवी करने वाले सहायक सॉलिसिटर जनरल SV राजू ने आजीवन कारावास की मांग की। अपनी दलील में उन्होंने कहा, “यह हत्या बेहद जघन्य है और इसने न्यायिक व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।” उन्होंने आगे तर्क दिया, “आरोपियों ने प्रभाव का इस्तेमाल करके सबूत नष्ट करने की कोशिश की और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाली।” उन्होंने अदालत से अपील की, समाज के लिए एक उदाहरण स्थापित करने के लिए सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए।”
आरोपियों के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए सजा कम करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपियों की अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी है और उनके जीवन को देखते हुए उन्हें न्यूनतम सजा दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
योगेश गौड़ा की 2016 में धारवाड़ स्थित उनके अपने जिम में हत्या कर दी गई थी। CBI द्वारा इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी बहस छिड़ गई थी। हालांकि, अदालत ने पूर्व मंत्री और विधायक विनय कुलकर्णी सहित सभी को आजीवन कारावास और मुआवजे का आदेश दिया।
भाजपा नेता की 15 जून, 2016 को धारवाड़ में हुई थी हत्या
हेब्बल्ली निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के जिला पंचायत सदस्य, 26 वर्षीय गौड़ा की 15 जून, 2016 को धारवाड़ में हत्या कर दी गई थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 24 सितंबर, 2019 को जांच अपने हाथ में ली और 5 नवंबर, 2020 को कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। कुलकर्णी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। सीबीआई का आरोप है कि गौड़ा के साथ कुलकर्णी की व्यक्तिगत दुश्मनी और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी, क्योंकि गौड़ा ने 2016 के जिला पंचायत चुनावों से हटने के उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। (एएनआई)











