— डीजीपी पंजाब ने सांझ प्लेटफॉर्म पर रक्षा मंत्रालय के सत्यापन के लिए ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल भी किया लॉन्च
— 384 थानों के 1,500–2,000 पुलिस कर्मियों को लैंगिक-संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग के लिए किया जा रहा तैयार: डीजीपी गौरव यादव
— सांझ प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन डिजिटल सत्यापन से डिफेंस वेरिफिकेशन का समय महीनों से घटकर कुछ दिनों का रह गया: विशेष डीजीपी गुरप्रीत कौर दियो
चंडीगढ़/जालंधर, 18 अगस्त: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक समावेशी, पीड़ित-केंद्रित और लैंगिक-संवेदनशील पुलिस व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने आज यहां फिल्लौर स्थित 134 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी (एम.आर.एस.पी.पी.ए.) में लैंगिक संवेदनशीलता परियोजना “पंजाब पुलिस में महिलाओं को मुख्यधारा में लाना” के तहत तीसरे चरण के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
यह पहल पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सी.ए.डी.) द्वारा जे-पाल साउथ एशिया और हरटेक फाउंडेशन के सहयोग से संचालित एक व्यापक प्रभाव आकलन प्रशिक्षण कार्यक्रम है। दिसंबर 2025 से चल रहे लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण का यह तीसरा और अंतिम चरण है। इस चरण के प्रशिक्षण में विशेष समूहों के तहत कुल 1,453 नामांकित पुलिस कर्मियों को शामिल किया जाएगा। इसमें पहले दिन मिश्रित समूह (टी-3), दूसरे दिन केवल पुरुषों का समूह (टी-2) और तीसरे दिन केवल महिलाओं का समूह (टी-1) शामिल होगा।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “राज्य स्तर पर तीन प्रशिक्षण दौरों के माध्यम से 384 पुलिस थानों के 1,500–2,000 पुलिस कर्मियों को लैंगिक-संवेदनशील, अधिकार-आधारित और पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग के लिए आवश्यक कौशल एवं समझ से लैस किया जा रहा है। इसमें महिलाओं, बच्चों और अन्य कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान दिया गया है।”
इस अवसर पर डीजीपी गौरव यादव ने पंजाब पुलिस के ‘सांझ’ प्लेटफॉर्म पर रक्षा मंत्रालय के सत्यापन के लिए ऑनलाइन डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया। यह डिजिटल पहल एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य नवनियुक्त रक्षा कर्मियों की सत्यापन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना तथा इसमें लगने वाले महीनों के समय को घटाकर कुछ दिनों तक करना है।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए डीजीपी गौरव यादव ने नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग की आवश्यकता पर जोर दिया और अधिकारियों को थानों में पहुंचने वाले सभी शिकायतकर्ताओं के साथ अपने दैनिक व्यवहार में सहानुभूति और संवेदनशीलता अपनाने के लिए प्रेरित किया।
पंजाब सरकार द्वारा पुलिस विभाग सहित अन्य सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पुलिस तंत्र को और अधिक सक्रिय, सुव्यवस्थित एवं बेहतर बनाया जाना चाहिए तथा महिलाओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला अधिकारियों को केवल नियमित डेस्क ड्यूटी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें जांच, खुफिया जानकारी जुटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित जिम्मेदारियां भी सौंपी जानी चाहिए।
विशेष डीजीपी कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सीएडी) गुरप्रीत कौर दियो ने बताया कि यह कार्यक्रम एक व्यापक ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) मॉडल के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न जिलों के 60 पुलिस अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, ताकि पुलिस स्टेशन स्तर पर कर्मचारियों को मानकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल उपलब्ध करवाकर प्रभावी प्रशिक्षण और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
इससे पहले डीजीपी गौरव यादव ने विशेष डीजीपी गुरप्रीत कौर दियो के साथ प्रतिष्ठित पूर्व पुलिस अधिकारियों और मुख्य प्रशिक्षकों, जिनमें महाराष्ट्र कैडर की पूर्व डीजीपी मीरा चड्ढा बोरवणकर और पंजाब कैडर के पूर्व डीजीपी आर.सी. सिंह शामिल थे, का स्वागत किया।
आर.सी. सिंह ने “जेंडर-रिस्पॉन्सिव पुलिसिंग: दृष्टिकोण से अभ्यास तक” विषय पर महत्वपूर्ण सत्र का संचालन किया, जबकि मीरा सी. बोरवणकर ने “पुलिसिंग में महिलाएं—नेतृत्व और भागीदारी” विषय पर सत्रों का नेतृत्व किया।
इस दौरान रक्षा मंत्रालय के मानव संसाधन निदेशक आरोन पामी ने पंजाब पुलिस की सक्रिय शासन व्यवस्था की सराहना की और सांझ पोर्टल पर ऑनलाइन डिजिटल सत्यापन मॉड्यूल विकसित करने के लिए डीजीपी तथा आईटी टीम का धन्यवाद किया।
उद्घाटन समारोह के दौरान जी.जी.डी.एस.डी. कॉलेज, चंडीगढ़ के जनसंचार विभाग की ओर से घरेलू हिंसा पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई।















