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सड़कें अवरुद्ध…पुल क्षतिग्रस्त, हिमाचल में मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित, एक की व्यक्ति मौत

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Himachal Weather Update : हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार को भारी से अत्यधिक भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। बारिश से सड़कें अवरुद्ध हो गईं, पुल क्षतिग्रस्त हो गए तथा अलग-अलग घटनाओं में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।

शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में 15 जुलाई तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, साथ ही 16 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए संभावित भूस्खलन, अचानक बाढ़, पेड़ों के उखड़ने और सड़कों के अवरुद्ध होने की आशंका के प्रति आगाह किया है। यहां जारी एक बयान में कहा गया है कि मूसलाधार बारिश के कारण दूरसंचार सेवाएं बाधित होने के बाद दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने चंबा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति जिलों तथा मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र में इंट्रा-सर्किल रोमिंग (आईसीआर) सुविधा शुरू कर दी है। आईसीआर सुविधा के तहत यदि आपके प्राथमिक दूरसंचार सेवा प्रदाता का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, तो आपका मोबाइल फोन स्वतः किसी अन्य दूरसंचार सेवा प्रदाता के नेटवर्क से जुड़ सकता है। ब्यास नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण पर्यटन विभाग ने रिवर राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है।

कुल्लू के जिला पर्यटन विकास अधिकारी रोहित शर्मा ने कहा, ”ब्यास नदी में रिवर राफ्टिंग पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि नदियों और नालों का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है, जिससे ब्यास नदी का जलस्तर और बढ़ जाएगा।” शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि स्थिति बिगड़ने पर जिला प्रशासन को शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण यदि स्कूल बंद किए जाते हैं, तो छात्रों के साथ-साथ शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी अवकाश दिया जाएगा। इससे पहले, अत्यधिक भारी बारिश के कारण सिरमौर और सोलन जिलों के सभी सरकारी एवं निजी शैक्षणिक संस्थान तथा आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए थे। भारी बारिश के कारण एक व्यक्ति की जान भी चली गई। कुल्लू जिले के आनी उपमंडल में बुआंदा-छवाई मार्ग पर दोपहर के समय पहाड़ी से गिरे बड़े पत्थरों की चपेट में आने से 70 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान बुआंदा गांव निवासी शिव राम के रूप में हुई है। वह बुआंदा से छवाई की ओर जा रहे थे, तभी घलाड़ नाला के पास हादसे में उनकी जान चली गई। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत मलबे से बाहर निकाला और सिविल अस्पताल, आनी पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि सोलन जिले के अर्की क्षेत्र में एक बड़ा पत्थर वाहन पर गिरने से दो लोग घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए कुनिहार के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि कार में पांच लोग सवार थे और कार गांभरपुल-सरली मार्ग पर जा रही थी, तभी अचानक उस पर पहाड़ी से पत्थर गिर गए। पत्थर गिरने की घटनाएं कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों से भी सामने आईं, जिसके कारण राजमार्ग की एक लेन बंद करनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार, राजमार्ग पर वाकनाघाट और कंडाघाट के बीच तथा धरमपुर और चक्की मोड़ के बीच चट्टानें गिरने की घटनाएं हुईं। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने यातायात को एक लेन तक सीमित कर दिया है।

मुख्य बेली पुल पर मंडरा रहा भूस्खलन का खतरा
अधिकारियों ने बताया कि किन्नौर जिले के सांगला के निकट मुख्य बेली पुल पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पुल को और नुकसान पहुंचा, तो सांगला घाटी का क्षेत्र के बाकी हिस्सों से संपर्क कट सकता है। किन्नौर के उपायुक्त अमित कुमार शर्मा ने पुष्टि की कि सांगला पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। यह पुल पिछले वर्ष सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और भारतीय सेना की सहायता से बनाया गया था। शर्मा ने कहा कि पुल को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद यातायात को कामरू गांव के रास्ते मोड़ा जा रहा है। उन्होंने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण शिमला जिले के रामपुर स्थित गणवी-2 पावर हाउस के जलाशय क्षेत्र में नांती खड्ड के स्पिलवे चैनल को नुकसान पहुंचा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, शिमला जिले में 27 संपर्क मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए बंद रहने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। छोटा शिमला के निकट बनमोर क्षेत्र में एक उखड़ा हुआ पेड़ प्रमुख स्थानीय मार्ग पर गिर गया, जिससे मंत्रियों और विधायकों के सरकारी आवास वाले क्षेत्र सहित कई रिहायशी इलाकों का संपर्क बाधित हो गया। स्थानीय निवासियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन विभाग से शेष सूखे और खतरनाक पेड़ों को जल्द हटाने की मांग की।