
चंडीगढ़ : निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा है कि हमारा मानना है कि विकसित भारत का मार्ग विद्यालयों के गलियारों से होकर गुजरता है और शिक्षा ही वह सबसे प्रभावी माध्यम है जिसके द्वारा इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यदि देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचानी होगी। निसा और उसके सभी सहयोगी इस राष्ट्रीय दायित्व के निर्वहन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। शिक्षक समाज का निर्माता होता है और वह अपनी जिम्मेदारियों से कभी विमुख नहीं हो सकता। इसलिए हम शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपनी सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाते रहेंगे।
प्रश्न: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की बात प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही है। निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते आप इसे किस प्रकार देखते हैं और विकसित भारत के निर्माण में निसा तथा उसके सहयोगियों की क्या भूमिका रहेगी?
उत्तर: निसा विकसित भारत के निर्माण में अपना पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा मानना है कि विकसित भारत का मार्ग विद्यालयों के गलियारों से होकर गुजरता है और शिक्षा ही वह सबसे प्रभावी माध्यम है जिसके द्वारा इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यदि देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचानी होगी। निसा और उसके सभी सहयोगी इस राष्ट्रीय दायित्व के निर्वहन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। शिक्षक समाज का निर्माता होता है और वह अपनी जिम्मेदारियों से कभी विमुख नहीं हो सकता। इसलिए हम शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपनी सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाते रहेंगे।
प्रश्न : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आप किस प्रकार देखते हैं? क्या इसका क्रियान्वयन सही दिशा में हो रहा है और क्या यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी?
उत्तर: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक उत्कृष्ट दस्तावेज है, जिसमें शिक्षा से जुड़े अधिकांश महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसके क्रियान्वयन की दिशा में कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। हालांकि, किसी भी अच्छी नीति की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। चूंकि शिक्षा समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल तथा सतत निगरानी आवश्यक है। यदि नीति का सही ढंग से क्रियान्वयन किया गया, तो यह निश्चित रूप से विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रश्न : अभी तक के अनुभव के आधार पर क्या आपको शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में कोई कमी या चुनौती दिखाई देती है?
उत्तर: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक उत्कृष्ट दस्तावेज है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर लगातार निगरानी की आवश्यकता है। नीति के अध्याय 8 में एक स्वतंत्र नियामक संस्था (स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी) के गठन की बात कही गई है, ताकि स्कूल संचालन और नियमन के बीच हितों का टकराव न हो। दुर्भाग्यवश, कई राज्यों में इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है। यदि नीति के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन नहीं हुआ, तो इसके अपेक्षित परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
प्रश्न : आप निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और एक लाख से अधिक स्कूल आपके साथ जुड़े हुए हैं। निजी विद्यालयों के प्रति सरकारों के व्यवहार और सहयोग के बारे में आपकी क्या राय है?
उत्तर: देश के कई राज्यों में 50 प्रतिशत से अधिक तथा पूरे भारत में लगभग 37 प्रतिशत बच्चे निजी विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। निजी विद्यालय सरकार की जिम्मेदारी को साझा करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर परिणाम दे रहे हैं। हालांकि, यह कहना पड़ेगा कि निजी विद्यालयों और उनके विद्यार्थियों को सरकारों से अपेक्षित सहयोग और समान व्यवहार नहीं मिल रहा है। अनेक योजनाओं में भेदभाव दिखाई देता है, जबकि विकसित भारत के निर्माण में सभी विद्यार्थियों और विद्यालयों के साथ समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
प्रश्न : कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता और इससे पैदा हो रही आर्थिक असमानता को कैसे दूर किया जा सकता है?
उत्तर: वर्तमान व्यवस्था में 12वीं तक की स्कूली शिक्षा और बोर्ड प्रमाणपत्रों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता, जिसके कारण विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। निसा का मानना है कि प्रवेश परीक्षाओं का पाठ्यक्रम स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले सिलेबस से जोड़ा जाए और बोर्ड परीक्षाओं को उचित वेटेज दिया जाए। इससे कोचिंग पर निर्भरता कम होगी, आर्थिक असमानता घटेगी, अभिभावकों पर वित्तीय बोझ कम होगा और स्कूली शिक्षा में लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा।
प्रश्न : हरियाणा में ‘एक हरियाणा, एक हरियाणवी’ का नारा दिया जाता है। क्या फिर भी आपको विद्यार्थियों के बीच भेदभाव दिखाई देता है?
उत्तर: दुर्भाग्यवश, विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की यह प्रवृत्ति अभी भी दिखाई देती है। हरियाणा में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने की कई योजनाओं में मुख्य रूप से सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि निजी विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थी भी समान रूप से सम्मान और प्रोत्साहन के अधिकारी हैं। हमारी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अपील है कि सभी विद्यार्थियों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन दिया जाए, क्योंकि विद्यार्थी केवल विद्यार्थी होते हैं, उनका विभाजन उचित नहीं है।
प्रश्न : विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में आपके प्रमुख सुझाव क्या हैं?
उत्तर: सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उसकी मूल भावना के अनुरूप प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। केंद्र और राज्य सरकारों को समन्वय के साथ जवाबदेही तय करनी चाहिए तथा नीति के प्रावधानों, विशेषकर स्वतंत्र नियामक व्यवस्था और शिक्षा सुधारों को गंभीरता से लागू करना चाहिए। साथ ही विद्यार्थियों, शिक्षकों, सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करना आवश्यक है। हमारा विश्वास है कि शिक्षित भारत ही विकसित भारत की सशक्त आधारशिला बनेगा।















