
नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश पुलिस ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के कथित गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी दान की हेराफेरी के संबंध में पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर की गई।
ट्रस्ट की शिकायत पर हुई कार्रवाई
यह मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज किया गया था। कृष्ण मोहन, जो लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी हैं और भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी रहे हैं, को सितंबर 2025 में ट्रस्टी बनाया गया था। पुलिस ने यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों के बाद उठाया है।
ये हैं आरोपी और लगीं ये धाराएं
FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नी को नामजद किया गया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (जैसे 305, 306, 316(5), 317(4)) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
राजनीतिक घमासान तेज
इस मामले ने 7 जून को तब तूल पकड़ा जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने करोड़ों रुपये के दान के गायब होने की खबरों का हवाला देते हुए अदालती संज्ञान की मांग की थी। FIR दर्ज होने के बाद अखिलेश यादव ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ‘X’ पर पोस्ट किया कि भाजपा सरकार में “छोटी मछलियों को दंडित किया जाएगा जबकि बड़ी मछलियों को बचा लिया जाएगा”। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि SIT का इस्तेमाल सबूतों को मिटाने और यह तय करने के लिए किया गया हो सकता है कि किसे फंसाना है और किसे बचाना है।
दूसरी ओर, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रमुख आलोक कुमार ने विपक्षी दलों पर पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले इस विवाद के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
















