बिजनेस डेस्कः सोने और चांदी के लिए 2026 काफी उतार-चढ़ाव वाला साबित हो रहा है। साल की शुरुआत में चांदी में जबर्दस्त उछाल देखने को मिला, जिससे यह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। हालांकि इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली। जनवरी के आखिर में चांदी 121.64 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। तब से इसका भाव 43 फीसदी क्रैश कर गया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में चांदी की चाल कैसी रहेगी।
12 जून को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी में तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव 0.63 फीसदी चढ़कर 67 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया। इधर, भारत में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सिल्वर फ्यूचर्स 2.9 फीसदी चढ़कर 2,46,604 रुपए प्रति किलो पर बंद हुआ। इस तेजी के बावजूद यह लगातार पांचवां हफ्ता है, जब सिल्वर में गिरावट देखने को मिली है।
एक्सपर्ट्स को तेजी की उम्मीद
एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबी अवधि में चांदी की कीमतों में फिर तेजी दिख सकती है। विभिन्न वैश्विक वित्तीय संस्थानों और विश्लेषकों ने चांदी के लिए सकारात्मक अनुमान जताए हैं। कुछ अनुमानों अनुसार, आने वाले समय में चांदी 80-90 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकती है।
जेपी मॉर्गन का कहना है कि इस साल के आखिर तक चांदी 85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। बैंक ऑफ अमेरिका ने करीब 86 डॉलर का टारगेट दिया है।
इंडस्ट्रियल मांग दे रही सहारा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की सबसे बड़ी ताकत इसका इंडस्ट्रियल इस्तेमाल है। सोने की तुलना में चांदी का इस्तेमाल निवेश के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, मेडिकल उपकरण और कई अन्य उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बनी हुई है।














