चंडीगढ़: हरियाणा में महिला सशक्तीकरण (Women Empowerment) की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) न केवल प्रशासनिक सुधार का जरिया बनी है, बल्कि इसने समाज के ताने-बाने को बदलते हुए महिलाओं को घर का असली मुखिया बनाने का काम किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के 30 प्रतिशत से अधिक परिवारों की मुखिया अब महिलाएं हैं।
आमतौर पर भारतीय समाज में परिवार का मुखिया किसी पुरुष (पिता, पति या बड़े भाई) को ही माना जाता रहा है। लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा लागू किए गए परिवार पहचान पत्र (PPP) ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।पीपीपी (PPP) के डेटाबेस में अब 30% से ज्यादा परिवारों ने स्वेच्छा से या पात्रता के नियमों के तहत महिलाओं को परिवार के ‘मुखिया’ (Head of the Family) के रूप में दर्ज कराया है।इस कदम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के सामाजिक स्तर और निर्णय लेने की क्षमता में भारी बढ़ोतरी हुई है।
महिला मुखिया बनने से क्या हो रहे हैं फायदे?
सरकारी योजनाओं और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में महिलाओं को केंद्र में रखने से जमीन पर कई सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं (जैसे राशन, सब्सिडी, और पेंशन) का लाभ अब सीधे परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में ट्रांसफर हो रहा है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है।डिपो से मिलने वाले राशन और अन्य सुविधाओं में महिला मुखिया वाले परिवारों को प्राथमिकता मिल रही है।’मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना’ जैसी बड़ी योजनाओं का खाका तैयार करने और गरीब परिवारों की पहचान करने में पीपीपी के इस डेटा से बेहद मदद मिल रही है।











