11 जेईई क्वालीफायरों के साथ पटियाला जिला प्रदेश में रहा सबसे आगे : हरजोत सिंह बैंस
– मान सरकार की शिक्षा क्रांति ने केवल अमीर विद्यार्थियों के द्वारा ही आईआईटी पास करने के भ्रम को तोड़ा : बैंस
– शिक्षा मंत्री ने सफल विद्यार्थियों को बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं
चंडीगढ़:शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि “पंजाब शिक्षा क्रांति” पहल की सफलता की सजीव तस्वीर पेश करते हुए प्रदेश के सरकारी स्कूलों के 59 विद्यार्थियों ने भारत की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस्ड 2026 पास कर ली है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 44 क्वालीफायरों की तुलना में इस बार 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने 59 सफल विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी, जिनकी मेहनत और लगन से यह सफलता हासिल हुई है।
जिला-वार आंकड़े साझा करते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि पटियाला जिला 11 क्वालीफायरों के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद संगरूर 7 विद्यार्थियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। लुधियाना, फिरोजपुर और एसएएस नगर से 6-6 विद्यार्थी चयनित हुए। फतेहगढ़ साहिब से 5, अमृतसर और जालंधर से 4-4, बठिंडा और गुरदासपुर से 3-3, फाजिल्का से 2 तथा रूपनगर और होशियारपुर से 1-1 विद्यार्थी जेईई एडवांस्ड पास करने में सफल रहे।
इस उपलब्धि को सरकारी स्कूल शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर बताते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “यह कोई अचानक हुआ चमत्कार नहीं है, बल्कि हम एक साल में 44 से 59 तक पहुंच गए हैं।” उन्होंने कहा कि अब गांव का बच्चा भी अगर हिम्मत रखता है तो मुश्किलों को पार कर सकता है और लाखों रुपये की कोचिंग खर्च किए बिना भारत की सबसे कठिन परीक्षा पास कर सकता है।
पंजाब शिक्षा क्रांति की यही सच्चाई है जो अब साकार होती दिख रही है। हमारे विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़कर जेईई एडवांस्ड पास कर रहे हैं, एसी कोचिंग सेंटर्स से नहीं। यही असली क्रांति है।
स. बैंस ने कहा, “यह नतीजा उस भ्रम को भी दूर करता है कि आईआईटी में केवल बड़े-बड़े प्राइवेट कोचिंग हब से पढ़े छात्र ही जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब शिक्षा क्रांति का असली लक्ष्य आधारभूत हस्तक्षेप और योग्य शिक्षकों की सही मार्गदर्शन के माध्यम से सरकारी स्कूलों को उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग कौशल पैदा करने वाला बनाना है। अब पंजाब का हर बच्चा बड़े सपने देख सकता है और देश की सबसे कठिन परीक्षाएं पास कर सकता है।
इस उपलब्धि का श्रेय व्यवस्थागत सुधारों को देते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह सफलता मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार की ‘पंजाब शिक्षा क्रांति’ के लक्षित कार्यों का नतीजा है। यह पहल सरकारी स्कूलों में जेईई और नीट की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, बेहतर बुनियादी ढांचा और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि विपक्षी नेताओं ने पहले सरकार के कोचिंग कार्यक्रमों को ‘चुनावी जुमला’ बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन जेईई और नीट क्वालीफायरों में साल-दर-साल लगातार वृद्धि असली सच दिखाती है, क्योंकि आंकड़े झूठ नहीं बोलते। हमारे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब देश के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों के साथ मुकाबला करने के योग्य बन रहे हैं।
स. बैंस ने कहा कि हर सफल विद्यार्थी के पीछे दृढ़ इरादा, त्याग और मेहनत की कहानी छिपी होती है। उन्होंने कहा कि जेईई एडवांस्ड में पंजाब के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की सफलता केवल एक परीक्षा का नतीजा नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिले शैक्षणिक अवसर जीवन कैसे बदल सकते हैं।
स. बैंस ने होशियारपुर के स्कूल ऑफ एमिनेंस भगपुर सटौर की प्रिया भारद्वाज की कहानी का जिक्र करते हुए बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी एकल मां ने निजी कंपनी में काम करके मात्र 1.44 लाख रुपये की सालाना आय से बेटी को पाला और परिवार का गुजारा चलाया। आर्थिक तंगी के बावजूद प्रिया अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर और प्रतिबद्ध रही तथा पंजाब सरकार की कोचिंग और मार्गदर्शन से जेईई एडवांस्ड पास किया। वह अब इंजीनियर बनकर अपने स्वर्गीय पिता के सपने को पूरा करना चाहती है।
सफल विद्यार्थियों में एसएएस नगर के स्कूल ऑफ एमिनेंस मुल्लांपुर के प्रभजोत सिंह भी शामिल हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और मां गृहिणी हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले प्रभजोत को पंजाब सरकार द्वारा दी गई अकादमिक सहायता, शिक्षकों और प्रिंसिपल से लगातार हौसला मिला। वह इंजीनियर बनकर अपने परिवार का जीवन स्तर ऊंचा उठाना चाहते हैं।
इसी प्रकार फतेहगढ़ साहिब के स्कूल ऑफ एमिनेंस अमलोह के हर्ष माधव ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा दी गई निःशुल्क कोचिंग, मॉक टेस्ट और मार्गदर्शन ने उन्हें जेईई एडवांस्ड की तैयारी में मदद की। उनके पिता निजी कंपनी में 18,000 रुपये प्रतिमाह कमाते हैं और परिवार निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकता था। वह अब आईआईटी मुंबई में दाखिला लेकर अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने की इच्छा रखते हैं।
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