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पुतिन-जिनपिंग ने बदली ग्लोबल गेम ! अमेरिका को डॉलर पर दी खुली चुनौती, कहा-अब रूबल और युआन में होगा तेल-गैस कारोबार

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Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) चीन पहुंच रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) से होगी। इस दौरे को वैश्विक राजनीति में उभरते “मॉस्को-बीजिंग एक्सिस” के रूप में देखा जा रहा है।रूस ने संकेत दिए हैं कि यूरोप के साथ भविष्य के तेल और गैस सौदे अब अमेरिकी डॉलर की बजाय रूसी रूबल और चीनी युआन में किए जाएंगे। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की पकड़ को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
रूसी और चीनी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार अब लगभग पूरी तरह “डी-डॉलराइज्ड” हो चुका है। यानी ज्यादातर लेनदेन अब डॉलर के बिना रूबल और युआन में हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 200 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। साथ ही रूस और चीन के बीच वीजा-फ्री यात्रा व्यवस्था भी लागू की गई है। क्रेमलिन के मुताबिक, पुतिन और शी जिनपिंग आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, BRICS और Shanghai Cooperation Organisation जैसे मंचों की भूमिका और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह यात्रा चीन-रूस मैत्री संधि की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है।

बीजिंग स्थित थिंक टैंक “सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन” के विशेषज्ञों का कहना है कि चीन एक तरफ अमेरिका के साथ रिश्तों को स्थिर रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी और मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन अब खुद को ऐसी “बड़ी शक्ति” के रूप में पेश करना चाहता है जो पश्चिम और रूस दोनों के साथ संतुलन बनाकर चल सके। लेकिन मौजूदा हालात में रूस और चीन की बढ़ती नजदीकियां अमेरिका और यूरोप के लिए बड़ी रणनीतिक चुनौती बनती जा रही हैं।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश BRICS को “नए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था” का आधार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पुतिन ने भी कहा है कि यह गठबंधन किसी के खिलाफ नहीं बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए है। हालांकि पश्चिमी देशों में इसे अमेरिकी प्रभाव को कमजोर करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच ऊर्जा बाजार, व्यापारिक मार्गों और वैश्विक भुगतान प्रणाली में तेजी से हो रहे बदलावों ने दुनिया को नए आर्थिक ब्लॉक्स की ओर धकेलना शुरू कर दिया है। रूस-चीन की यह साझेदारी आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का संतुलन बदल सकती है।