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कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल द्वारा राजस्थान फीडर नहर की रीलाइनिंग के कार्य का जायज़ा

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  • रीलाइनिंग का उद्देश्य नहर में बार-बार पड़ने वाली दरारों को रोकना, आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित करना: बरिंदर कुमार गोयल
  • सरहिंद फीडर नहर की रीलाइनिंग पर ख़र्च किए गए 800 करोड़ रुपये
  • राजस्थान फीडर के 16.62 किलोमीटर क्षेत्र पर ख़र्च किए जा रहे हैं 170 करोड़ रुपये
  • 60 साल बाद हुई दोनों नहरों की रीलाइनिंग: बरिंदर कुमार गोयल
  • शहर के समीप कंक्रीट की जगह 12.50 किलोमीटर क्षेत्र में की जा रही है ईंटों की रीलाइनिंग

चंडीगढ़/फ़रीदकोट:पंजाब के कैबिनेट मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज राजस्थान फीडर नहर की चल रही रीलाइनिंग परियोजना का जायज़ा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य निर्धारित समय के भीतर पूरा किया जाए।

श्री गोयल ने बताया कि यह नहर पंजाब के कई गांवों और शहरों के नज़दीक से गुज़रती है और लगभग 60 वर्ष पुरानी होने के कारण इसकी लाइनिंग काफ़ी जर्जर हो चुकी थी। पिछले समय के दौरान राजस्थान फीडर नहर और सरहिंद फीडर के कॉमन बैंक टूटने के कारण आसपास के क्षेत्रों में नुकसान का ख़तरा बना रहता था। इसी नुकसान को रोकने के उद्देश्य से यह कार्य करवाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सरहिंद फीडर नहर के पुनर्निर्माण का कार्य 800 करोड़ रुपये की लागत से पहले ही पूरा किया जा चुका है और अब राजस्थान फीडर नहर की रीलाइनिंग पूरी होने के बाद दोनों नहरों के साथ लगते गांवों और शहरों को संभावित जान-माल के नुकसान से बचाया जा सकेगा तथा खेतों को अधिक नहरी पानी उपलब्ध होगा।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि फ़रीदकोट की सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए फ़रीदकोट शहर के निकट राजस्थान फीडर की 12.50 किलोमीटर लंबाई में कंक्रीट की बजाय ईंटों की लाइनिंग की जा रही है ताकि भूजल रिचार्ज को सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि रीलाइनिंग कार्य पूरा होने के बाद नहर को उसकी क्षमता के अनुसार चलाया जाएगा और राजस्थान को उसके हिस्से के अनुसार ही पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिंचाई व्यवस्था को मज़बूत करने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा और भूजल संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि राजस्थान फीडर नहर की 80 किलोमीटर रीलाइनिंग का कार्य वर्ष 2023 तक सफ़लतापूर्वक पूरा कर लिया गया था, लेकिन नहर बंदी नहीं मिलने के कारण शेष कार्य पूरा नहीं हो सका था। अब वर्ष 2026 की बंदी के दौरान बाकी बची 16.62 किलोमीटर लाइनिंग का कार्य युद्ध स्तर पर करवाया जा रहा है, जिस पर लगभग 170 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा भूजल बचाने के लिए 6700 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप सिंचाई में उपयोग होने वाले नहरी पानी की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 78 प्रतिशत हो गई है। इससे किसानों के टेल-एंड के खेतों तक नहरी पानी पहुंचा है। उन्होंने कहा कि आज पंजाब का हर किसान नहरी पानी से अपने खेतों की सिंचाई कर रहा है।

विधायक फ़रीदकोट स. गुरदित्त सिंह सेखों ने फ़रीदकोट शहर को इतना बड़ा प्रोजेक्ट देने के लिए कैबिनेट मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल और पंजाब सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनकी मांग पर सरकार ने नहर का बेड कंक्रीट की जगह ईंटों से बनाने का निर्णय लिया, जिसके लिए वे सरकार के आभारी हैं। विधायक स. गुरदित्त सिंह सेखों ने कहा कि इन नहरों की रीलाइनिंग से क्षेत्र में सेम की समस्या का स्थायी समाधान होगा।

 

इस अवसर पर चेयरमैन मार्केट कमेटी फ़रीदकोट स. अमनदीप सिंह बाबा, एस.डी.एम. फ़रीदकोट पुनीत शर्मा, मुख्य इंजीनियर नहरें स. शेर सिंह, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर फ़िरोज़पुर नहरें श्री संदीप गोयल, एक्सियन रमनप्रीत सिंह मान सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।