Punjab Elections 2027: बिहार में बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गंगा के बहाव का जिक्र करते हुए कहा था कि जैसे गंगा बिहार से बंगाल जाती है, वैसे ही बिहार की जीत बंगाल में जीत का रास्ता बनाएगी। लेकिन अब यह साफ दिख रहा है कि बीजेपी की नजर सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने पंजाब के 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भी अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
West Bengal Election अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुए हैं, लेकिन पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के नेता Raghav Chadha और कुछ अन्य सांसदों का बीजेपी में शामिल होना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
PM Modi का संदेश- हर समय चुनावी मोड में रहना जरूरी नहीं
बीजेपी की राजनीति का तरीका साफ है – रफ्तार बनाए रखो और चुनावी मशीन को कभी रुकने मत दो। यही वजह है कि पार्टी लगातार एक चुनाव से दूसरे चुनाव की तैयारी में लगी रहती है। हालांकि Narendra Modi ने यह कहा है कि चुनाव जीतने के लिए हर समय चुनावी मोड में रहना जरूरी नहीं, बल्कि जनता से भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा अहम है।
बंगाल चुनाव के दौरान मोदी ने कई रैलियां कीं, वहीं गृह मंत्री Amit Shah भी लंबे समय तक राज्य में डटे रहे। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और अन्य नेताओं ने भी प्रचार में पूरी ताकत झोंकी। BJP का मजबूत संगठन सिर्फ बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है। बूथ स्तर तक हजारों कार्यकर्ता लगातार काम करते हैं, जिससे पार्टी की चुनावी पकड़ मजबूत बनी रहती है।
पंजाब में बीजेपी के पास बड़े चेहरों की कमी
अगर पंजाब की बात करें, तो यहां बीजेपी की स्थिति अभी उतनी मजबूत नहीं है। लंबे समय तक Shiromani Akali Dal के साथ गठबंधन में रहने के कारण पार्टी अपने दम पर मजबूत नेतृत्व तैयार नहीं कर पाई। 2020 में किसान आंदोलन के दौरान दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था।
फिलहाल पंजाब में बीजेपी के पास बड़े चेहरों की कमी है। Ravneet Singh Bittu जैसे कुछ नेता पार्टी में जरूर आए हैं, लेकिन चुनाव जीतने के लिए और मजबूत स्थानीय नेतृत्व की जरूरत है। यही वजह है कि Raghav Chadha और अन्य नेताओं का शामिल होना बीजेपी के लिए अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी चुनाव के लिए इंतजार नहीं करती। बंगाल की लड़ाई खत्म होने से पहले ही पंजाब की जमीन तैयार की जा रही है। पार्टी के लिए 10 महीने लंबा समय नहीं, बल्कि एक और जीत की तैयारी का मौका है।














