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“मान जाखड़ के पत्र पर चुप क्यों? जिसमें हाईकोर्ट जज द्वारा ड्रग तस्करों और राजनेताओं के गठजोड़ की जांच की मांग की गई है”

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“मान जाखड़ के पत्र पर चुप क्यों? जिसमें हाईकोर्ट जज द्वारा ड्रग तस्करों और राजनेताओं के गठजोड़ की जांच की मांग की गई है”

चंडीगढ़ :  मुख्यमंत्री भगवंत मान का नशे के विरुद्ध अभियान उसी प्रकार एक पब्लिसिटी स्टंट है जैसे उनका करप्शन के खिलाफ अभियान पंजाबियों की आंखों में धूल झोंकने वाला अभियान है । यह आरोप है भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश मीडिया प्रमुख विनीत जोशी का ।

अपने आरोपों को पुख्ता बताते हुए जोशी ने प्रूफ के तौर पर बताया कि सरकार बनने के कुछ दिनों बाद 24 मई 2022 को भगवंत मान ने यह कहते हुए की उन्हे अपने मंत्री के खिलाफ करप्शन के प्रूफ मिलें हैं और मंत्री ने उनके सामने कबुला है, उस मंत्री विजय सिंगला का इस्तीफा ले उसे पंजाब विजिलेन्स से गिरफ्तार करवा दिया। अब पंजाब विजिलेन्स द्वारा मोहाली की अदालत में पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंगला या उनके ओएसडी प्रदीप कुमार के खिलाफ कोई प्रूफ नहीं है । इसका मतलब भगवंत मान ने झूठ बोल था, पंजाबियों को गुमराह किया था । ठीक इसी प्रकार नशे के खिलाफ अभियान में भी पंजाबियों को झूठ बोल कर बबेकुफ़ बना रहे हैं ।

भगवंत मान से जोशी ने सवाल पूछा कि तरनतारन, फिरोजपुर, लुधियाना, जालंधर, मोहाली जैसे जिलों में नशे के कारोबार में संलिप्त होने के सार्वजनिक आरोप जिन आप सरकार के नेताओं और विधायकों पर लग रहे हैं उन पर कार्रवाई करने से वे क्यों कतरा रहे है?

जोशी ने भगवंत मान के दोहरे मापदंड को नंगा करते हुआ कहा कि आप विधायक डॉ. अजय गुप्ता ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि “नशा सरेआम बिक रहा है और कुछ आप पार्टी के बड़े नेता इसमें शामिल हैं।” इसी तरह, कुंवर विजय प्रताप जिहे अब पार्टी से निकल दिया है, ने दो पुलिस अधिकारियों पर नशा व्यापार में संलिप्त होने के आरोप लगाए, जिन्हें राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का करीबी बताया गया। “मान अपनी ही पार्टी के नेताओं के इन आरोपों की जांच क्यों कतरा रहे है ?”

16 जून 2025 को पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भगवंत मान को पत्र लिख मांग की कि वे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश से नशीले पदार्थों के धन के लेन-देन की ‘समयबद्ध’ जांच किसी विश्वसनीय एजेंसी, या फिर बहु-एजेंसी जांच, मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराने का अनुरोध करें ताकि नशे की बिक्री से होने वाली कमाई के असली शक्तिशाली और प्रभावशाली लाभार्थियों का पर्दाफाश हो सके। इस पत्र पर भगवंत मान एक्शन ले माननीय मुख्य न्यायाधीश क्यूँ नहीं लिख रहे ?

जोशी ने आखिर में कहा कि “आप सरकार नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय अपने नेताओं को बचाने में लगी है। यदि सरकार ईमानदार है, तो इन सभी मामलों में तुरंत कार्रवाई करे । पंजाब के युवाओं की जिंदगी दांव पर लगी है, और आप सरकार की चुप्पी इस समस्या को और बढ़ावा दे रही है।”