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661 करोड़ बैंक घोटाले में CBI की तीसरी गिरफ्तारी, अब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कर्मी दबोचा

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चंडीगढ़ : हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े 661 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में सी.बी.आई. का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। 2 सीनियर आई.ए.एस. अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद सी.बी.आई. ने बुधवार को हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के कर्मचारी सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया है।

सी.बी.आई. अनुसार सौरभ हरियाणा पॉल्यूशन स्टेट कंट्रोल बोर्ड के अकाऊंट ब्रांच में डाटा एंट्री आप्रेटर है। गिरफ्तारी के बाद उसे पंचकूला की जिला अदालत में पेश किया गया जहां से उसे 4 दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। एजेंसी का दावा है कि सौरव शर्मा ने निजी बैंकों को अनुचित लाभ पहुंचाने, सरकारी धन के निवेश नियमों की अनदेखी करने और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिटाने में भूमिका निभाई। उधर, अभी तक इस मामले में 2 आई.ए.एस. आर. के. सिंह और पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी हो चुकी है। फिलहाल सी.बी.आई. पंकज अग्रवाल को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

169 करोड़ से अधिक के नुकसान का दावा

सी.बी.आई. के दस्तावेजों के मुताबिक, 13 मार्च 2025 से 13 फरवरी 2026 के बीच खाते से कई संदिग्ध डैबिट ट्रांजैक्शन हुए जिनके जरिए करीब 187.26 करोड़ रुपए विभिन्न शैल कम्पनियों में ट्रांसफर किए गए। कुछ क्रैडिट एंट्री के बाद भी सरकारी खाते को 169.35 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। एजेंसी का आरोप है कि निवेश के बादधन को शैल कंपनियों के माध्यम से बाहर निकाल लिया गया जिससे बड़े पैमाने पर सरकारी धन की हेराफेरी हुई। सी.बी.आई. ने दावा किया कि सौरव निजी बैंकों के प्रतिनिधियों को निवेश प्रस्तावों, ब्याज दरों, फंड मैच्योरिटी तथा सरकारी फाइलों की गतिविधियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां उपलब्ध कराता था। इससे संबंधित बैंक अपने प्रस्ताव उसी अनुरूप तैयार कर पाते थे।

मोबाइल से चैट डिलीट, डिजिटल सबूत नष्ट करने की आशंका

 

सी.बी.आई. अनुसार, जब आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया गया तो उसमें मौजूद कई मूल चैट और संचार रिकॉर्ड गायब मिले। एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने न तो डिलीट डेटा वापस लाने में सहयोग किया और न ही संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया। इससे साक्ष्य मिटाने और जांच को प्रभावित करने की आशंका पैदा हुई है।

निवेश सीमा जानते हुए भी सौरभ ने निजी बैंक को पहुंचाया फायदा

सी.बी.आई. ने अदालत को बताया कि सौरव शर्मा को सरकारी धन निवेश से जुड़े वित्त विभाग के नियमों और सीमाओं की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उसने कथित रूप से निजी बैंक के पक्ष में निवेश प्रस्तावों को प्रोसैस करने में सहायता की। आई. डी.एफ. सी. फर्स्ट बैंक में सरकारी धन जमा करने की सीमा 50 करोड़ रुपए थी लेकिन मार्च 2025 में यह राशि बढ़कर 67.9 करोड़ रुपए पहुंच गई। बाद में जून 2025 में यह निवेश 105.68 करोड़ रुपए और अक्तूबर 2025 में 113.68 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।