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पंजाब राज्य खाद्य आयोग और रीजेनेरेटिंग पंजाब ने मिट्टी की सेहत और खाद्य सुरक्षा के लिए जीवित मिट्टी मिशन और ‘धरती दियाँ धींयाँ’ पहलकदमियां की शुरुआत संबंधी गहन विचार विमर्श

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– पी.एस.एफ.सी. और रीजेनेरेटिंग पंजाब द्वारा 100 महिला चैंपियनों, गांवों के लिए ‘सॉइल कप’ और स्कूल स्तरीय कार्यक्रमों के साथ सुआइल रीजनरेटिंग क्रांति की शुरुआत बारे ठोस योजनाबंदी

चंडीगढ़:पंजाब की खाद्य सुरक्षा को मिट्टी की उर्वरता से जोड़ने के मिशन को आगे बढ़ाते हुए पंजाब राज्य खाद्य आयोग (पी.एस.एफ.सी.) ने आज यहां रीजेनेरेटिंग पंजाब संस्था के साथ मिलकर एक विस्तृत विचार-विमर्श किया, ताकि सभी भागीदारों की सक्रिय भागीदारी से इस संबंध में भविष्य की रणनीति तैयार की जा सके।

 

पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन श्री बाल मुकंद शर्मा ने चर्चा की शुरुआत की। इस दौरान कृषि, जल, स्वास्थ्य और जलवायु के आपसी गहरे संबंधों पर जोर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह विचार-विमर्श सत्र इस वर्ष अप्रैल में शुरू की गई ‘मिट्टी तों थाली तक’ (मिट्टी से प्लेट तक) पहल का विस्तार था।

 

रीजेनेरेटिंग पंजाब की संस्थापक सुमीत संधू के साथ मिलकर ‘जीवित मिट्टी मिशन’ और ‘धरती दियाँ धीयाँ’ जैसी नई अवधारणाओं की शुरुआत करते हुए चेयरमैन ने मिट्टी की सेहत को पुनर्जीवित करने और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी में जैविक पदार्थ मात्र 0.5 प्रतिशत रह गया है, जबकि इसकी आवश्यक मात्रा 5 प्रतिशत होनी चाहिए। इससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ण क्षमता विकसित हो सकेगी, जो गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

 

सुमीत संधू ने कहा कि इस ‘रीजनरेटिव क्रांति’ को सफल बनाने के लिए कई कदम उठाने की आवश्यकता है। इनमें मिट्टी और पर्यावरण, जल प्रणालियों, कृषि आजीविका, बाजार एवं मूल्य श्रृंखला तथा आंकड़ों जैसे विषयों पर केंद्रित कार्य समूहों का गठन करना शामिल है। साथ ही कृषि क्षेत्र की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए राज्य स्तर पर मिट्टी की क्षमता और गुणवत्ता की जांच भी की जानी चाहिए।

 

आयोग के चेयरमैन को यह भी अवगत कराया गया कि एक परीक्षण परियोजना के रूप में मोगा जिले के घोलियां कलां गांव में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है।

 

इस अवसर पर ‘धरती दियाँ धीयाँ’ नामक एक नई पहल की भी शुरुआत की गई, जिसके तहत महिलाओं को सूआइल रीजनरेशन चैंपियन और पर्यावरण संरक्षण की अग्रणी के रूप में प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया जाएगा। ये महिलाएं पंजाब की भूमि, जल और खाद्य प्रणालियों के पुनर्जीवन को दिशा और प्रेरणा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राज्य के 23 जिलों में ऐसी 100 महिला नेताओं का चयन किया जाएगा।

 

इस पहल में स्कूल स्तर के कार्यक्रम भी शामिल हैं, जो बच्चों और युवाओं को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही किसानों से लेकर परिवारों तक पूरे गांव को मिट्टी की सेहत बहाल करने के इस महत्वपूर्ण अभियान में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

इस पहलकदमी की विलक्षण विशेषताओं में से एक गाँव पद्धरी मुकाबला सोआइल कप शुरू करना है, जिसमें उन गाँवों को इनाम दिया जायेगा जो अपनी मिट्टी, वातावरण का पालन पोषण करते हैं और अपना भविष्य सुरक्षित करते हैं।

 

इस अवसर पर रीजेनेरेटिंग पंजाब के सह-संस्थापक अरिंदम मुखर्जी, पंजाब टाउन प्लानिंग विभाग के सेवानिवृत्त निदेशक एम.एस. औजला, घोलियां कलां गांव के सरपंच एकमप्रीत सिंह तथा जैविक किसान चमकौर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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