नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह अगले हफ़्ते CBSE की उस पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें 1 जुलाई से शुरू होने वाली 9वीं क्लास के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच के सामने यह मामला उठाया। रोहतगी ने कहा, “यह एक ज़रूरी PIL है। याचिकाकर्ता छात्र, शिक्षक और माता-पिता हैं। वे CBSE की नई पॉलिसी को चुनौती दे रहे हैं, जिसके तहत 9वीं क्लास में दो और भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।”
सुप्रीम कोर्ट से इस मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए लिस्ट करने का आग्रह करते हुए रोहतगी ने कहा, “इससे अफ़रा-तफ़री मच जाएगी।” CJI ने कहा कि अगला हफ़्ता ‘मिसलेनियस हफ़्ता’ होगा और इस मामले को लिस्ट किया जाएगा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा जारी एक हालिया सर्कुलर के अनुसार, बोर्ड ने 1 जुलाई से शुरू होने वाली 9वीं क्लास के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
क्या है CBSE की नई भाषा नीति?
CBSE ने हाल ही में जारी अपने सर्कुलर में बताया था कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (NCF-SE 2023) के तहत लागू किया जा रहा है। नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को तीन भाषा स्तरों – R1, R2 और R3 – के तहत पढ़ाई करनी होगी।
R1 (Language 1): छात्र की मुख्य भाषा
R2 (Language 2): दूसरी अलग भाषा
R3 (Third Language): तीसरी भाषा, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा
CBSE के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएँ होना जरूरी होंगी।
कब से लागू होगी व्यवस्था?
CBSE की योजना के मुताबिक:-
2026-27 सत्र से कक्षा 6 और 9 में तीसरी भाषा अनिवार्य होगी
धीरे-धीरे इसे आगे की कक्षाओं में बढ़ाया जाएगा
2030-31 तक यह व्यवस्था 10वीं कक्षा तक पूरी तरह लागू कर दी जाएगी
हालांकि बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 10वीं में तीसरी भाषा के लिए अलग बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।
किन भाषाओं को मिलेगा स्थान?
CBSE ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि इस नीति में हिंदी और अंग्रेज़ी समेत भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को विकल्प के रूप में रखा गया है। इसके अलावा कई क्षेत्रीय और विदेशी भाषाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि छात्र एक ही भाषा को अलग-अलग स्तरों पर नहीं चुन सकेंगे। यानी R1 और R2 में समान भाषा नहीं रखी जा सकती।










