बिजनेस डेस्कः भारतीय रुपया गुरुवार (15 मई) के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपए ने पहली बार डॉलर के मुकाबले 96 का लेवल पार किया। लगातार चौथे दिन रुपए में गिरावट आई। रुपए 96.07 प्रति डॉलर तक फिसल गया, जो अब तक का रिकॉर्ड लो माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी जैसे कारण भी रुपए की कमजोरी की बड़ी वजह बने हैं। डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट से आयात महंगा होने और महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन
रुपया लगातार गिरावट की वजह से एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन वाली करेंसी बन गया है। बीते कुछ हफ्तों में इसमें तेज गिरावट आई है। इसकी वजह भारत का बढ़ता इंपोर्ट बिल है। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इसका असर रुपये पर पड़ रहा है।
कमजोरी जारी रहने के आसार
क्रूड की बढ़ती कीमतों के साथ घरेलू शेयर बाजार में विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली से भी रुपया पर दबाव बढ़ा है। फिलहाल अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद नहीं दिख रही। इससे क्रूड की कीमतें ऊंचे लेवल पर बनी रह सकती हैं या और ऊपर जा सकती हैं। इससे रुपए पर दबाव और बढ़ेगा।











