नई दिल्ली: संसद की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर देश के प्रतिष्ठित नागरिकों और पूर्व सार्वजनिक सेवकों ने एक खुला पत्र लिखकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया व्यवहार पर कड़ा ऐतराज जताया है। पत्र में 12 मार्च को संसद परिसर में हुई घटना का जिक्र करते हुए इसे ‘संसदीय परंपराओं का अपमान’ करार दिया गया है।
12 मार्च को संसद में विपक्ष के व्यवहार को लेकर 204 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने गंभीर चिंता जताई है। इन अधिकारियों में 116 सशस्त्र बलों के पूर्व जवान, 84 पूर्व नौकरशाह और 4 वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, जिन्होंने मिलकर एक खुला पत्र जारी किया है।
इस पत्र में खास तौर पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और अन्य विपक्षी सांसदों के संसद में आचरण पर सवाल उठाए गए हैं। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि संसद जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच पर सदस्यों का व्यवहार गरिमापूर्ण होना चाहिए, लेकिन हाल की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि संसद देश की सर्वोच्च संस्थाओं में से एक है, जहां जनता की आवाज उठाई जाती है। ऐसे में सांसदों का आचरण न सिर्फ संसद की मर्यादा से जुड़ा होता है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक छवि को भी प्रभावित करता है। अधिकारियों ने अपील की है कि सभी जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों को समझें और सदन की गरिमा बनाए रखें।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में संसद परिसर की सीढ़ियों पर राहुल गांधी और विपक्ष के कुछ अन्य सांसदों को चाय-बिस्कुट पीते हुए देखा गया था। यह सब उस वक्त हुआ जब माननीय स्पीकर ने संसद परिसर के भीतर किसी भी तरह के प्रदर्शन या धरने पर रोक लगा रखी थी। इसी व्यवहार को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
सदन की मर्यादा सर्वोपरि: पत्र में कहा गया है कि संसद केवल एक इमारत नहीं, बल्कि ‘लोकतंत्र का मंदिर’ है। इसकी सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी भी उतने ही पवित्र हैं जितना कि सदन का मुख्य कक्ष। यहाँ का आचरण उच्चतम मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
नियमों की अनदेखी: प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि राहुल गांधी ने न केवल स्पीकर के निर्देशों की अवहेलना की, बल्कि संसद की सीढ़ियों को ‘राजनीतिक तमाशे’ का केंद्र बना दिया। चाय-नाश्ता करने का यह तरीका देश की सर्वोच्च विधायी संस्था की गरिमा के अनुकूल नहीं था।
अहंकार और विशेषाधिकार का आरोप: पत्र में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष के नेता का यह व्यवहार एक खास तरह के ‘विशेषाधिकार के बोध’ और ‘अहंकार’ को दर्शाता है। यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की कमी और उकसावे की राजनीति का हिस्सा लगता है।
‘देश से माफी मांगें राहुल गांधी’
हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया है कि एक जिम्मेदार पद (नेता प्रतिपक्ष) पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसा आचरण किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और लोकतंत्र की छवि धूमिल होती है। पत्र के अंत में मांग की गई है कि राहुल गांधी अपने इस व्यवहार के लिए राष्ट्र से माफी मांगें और आत्मचिंतन करें ताकि संसद की संस्थागत पवित्रता बनी रहे।

















