नकोदर से लेकर बरगाड़ी बेअदबी और कोटकपूरा गोलीकांड तक बादल परिवार की स्पष्ट भूमिका – बलतेज पन्नू
उस वक्त गृह मंत्री रहे सुखबीर बादल ने जांच को प्रभावित किया, राजनीतिक फायदे के लिए जिम्मेदार सख्श को माफी दी: बलतेज पन्नू
चंडीगढ़:अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि बेअदबी की घटनाओं में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर भी चर्चा होनी चाहिए। इस पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि सुखबीर बादल अपनी राजनीति खत्म होते देख बेचैन हो गए हैं। वह घबराहट में इस तरह के बेतुके बयान दे रहे हैं।
रविवार को पार्टी कार्यालय चंडीगढ़ में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए आप नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखबीर बादल को ऐसे बयान देना के बजाय सिख भाईचारे से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि पूरा पंजाब जानता है कि बेअदबी की घटनाओं में किसकी भूमिका थी।
पन्नू ने कहा कि 1986 में जब नकोदर में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई थी, उस समय तो आम आदमी पार्टी थी भी नहीं। उस घटना में 4 नौजवान पुलिस की गोली से मारे गए। जस्टिस गुरनाम सिंह ने उस मामले की जांच की थी, लेकिन अपराधियों को बचाने के लिए उनकी रिपोर्ट को बादल सरकार के समय गायब कर दिया गया।
उस घटना में दो पुलिस अफसरों के नाम आए थे। एक दरबारा सिंह गुरू और दूसरा मोहम्मद इजहार आलम। दरबारा सिंह गुरु उस वक्त एडीसी थे और मोहम्मद इजहार आलम एसएसपी थे। इन दोनों को अकाली सरकार ने बाद में तरक्की दी और उनके रिटायर होने के बाद अकाली दल का हिस्सा भी बनाया। वह अकाली दल के टिकट पर चुनाव भी लड़े और इनको पार्टी में अहम पद दिए गए। सुखबीर बादल को इसका स्पष्टीकरण भी देना चाहिए।
जब जून 2015 में जवाहर सिंह वाला से गुरुग्रंथ साहिब जी का स्वरूप चोरी हुआ उस वक्त सुखबीर बादल गृहमंत्री थे। उसके बाद किस तरह के पोस्टर लगाए गए और किस तरह उस मामले की जांच प्रभावित की गई, यह भी किसी से छुपा नहीं है।
चरणजीत शर्मा उस वक्त फरीदकोट के एसएसपी थे। बहुत सारे लोगों ने पुलिस को मामले की जानकारी भी दी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं संदिग्ध लोगों को बाद में छोड़ दिया गया। यह भी नहीं पता चला वे संदिग्ध लोग कौन थे।
उसी दौरान बुर्ज जवाहर सिंह वाला में एक डेरा प्रेमी दुकानदार का मर्डर हो जाता है। उसकी पत्नी अनपढ़ थी लेकिन उसे पुलिस में नौकरी दी गई क्योंकि सुखबीर बादल गृहमंत्री थे और सारा फैसला उन्हीं के हाथ में था। उसके बाद उसमें शामिल लोगों को जिस तरह राजनीतिक ढ़ंग से माफी दी गई, वह भी सबके सामने है। इसके लिए उस समय के जत्थेदार साहब को सरकारी कोठी में बुलाकर एक पर्ची दी गई और माफ करने को कहा गया था। उसके बाद उस माफी को जस्टिफाई करने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पैसे से करीब 95 लाख के विज्ञापन दिलवाए गए। उस प्रक्रिया में तो अरविंद केजरीवाल नहीं थे। दरअसल सुखबीर बादल अपना पाप छुपाने के लिए आप संयोजक का नाम ले रहे हैं।
सबसे शर्मनाक तो यह है कि दिसंबर 2024 में इन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपने सारे गुनाह कबूल किए। फिर भी बेशर्मी पूर्वक मामले से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर किसी और का नाम ले रहे हैं।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिस वक्त बेअदबी और गोलीकांड की घटनाएं घट रही थी उस वक्त गृहमंत्री सुखबीर बादल हरियाणा के एक फाइव स्टार होटल में आराम फरमा रहे थे। इसका जिक्र फरीदकोट के जज ने अपने ऑर्डर में भी किया है। जबकि उन्होंने झूठ बोला कि उस वक्त वह विदेश में थे। इन सब चीजों का जवाब आज तक सुखबीर बादल ने नहीं दिया। आप नेता ने कहा कि उनके काम और उनकी हरकतों पंजाब के लोग पूरी तरह वाकिफ हैं। अब लोग उनकी किसी भी बातों पर भरोसा नहीं करने वाले।











