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‘ऑपरेशन कवच’: विद्यार्थी-केंद्रित निवारक पुलिसिंग पहल का उद्देश्य ‘कनेक्ट, डिटेक्ट, प्रोटेक्ट’ के त्रि-स्तरीय मॉडल के माध्यम से साथियों के दबाव को सुरक्षा में बदलना

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चंडीगढ़/लुधियाना/खन्ना: पारंपरिक नशा-विरोधी प्रवर्तन व्यवस्था को विद्यार्थी-केंद्रित निवारक मॉडल में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी), लुधियाना रेंज, संदीप गोयल ने आज गुलज़ार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, खन्ना में ‘ऑपरेशन कवच’ की शुरुआत की। ‘ऑपरेशन कवच’ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), खन्ना, डॉ. दर्पण आहलूवालिया की पहल है।

‘ऑपरेशन कवच’ का उद्देश्य केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय शुरुआती हस्तक्षेप और साथियों के सहयोग पर ध्यान केंद्रित करके युवाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा नेटवर्क तैयार करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीआईजी संदीप गोयल ने बताया कि नशीले पदार्थों का प्रसार साथियों के माध्यम से होता है। इसमें नशे का सेवन करने वाला एक व्यक्ति अनजाने में दूसरों को भी इस लत की ओर धकेल सकता है, जो आगे चलकर आपूर्ति श्रृंखला का रूप धारण कर लेती है।

डीआईजी ने कहा, “ऑपरेशन कवच का उद्देश्य इस नेटवर्क के प्रभाव को समाप्त करना है। दोस्तों के समूहों को नशे की दलदल में जाने का रास्ता बनने देने के बजाय, ‘कवच’ उन्हें एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करने में सक्षम बनाएगा। इसके तहत समस्याओं की पहचान शुरुआती चरण में ही कर ली जाएगी और समस्या के गंभीर रूप लेने या अपराध बनने से काफी पहले सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।”

इस पहल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एसएसपी खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने बताया कि ‘ऑपरेशन कवच’ तीन परस्पर जुड़े स्तंभों—‘कनेक्ट, डिटेक्ट और प्रोटेक्ट’ (जुड़ना, पहचानना और सुरक्षा प्रदान करना)—पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि ‘कनेक्ट’ के तहत विद्यार्थियों को ‘पीयर ग्रुप’ यानी साथी समूह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जो आगे चलकर आपसी सहायता नेटवर्क के रूप में विकसित होंगे। इसका मूल सिद्धांत यह है कि किसी भी विद्यार्थी को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसे किसी कठिन परिस्थिति का अकेले सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि इन साथी समूहों को नामित नागरिक एवं पुलिस मेंटर्स (मार्गदर्शकों) से जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच एक विश्वसनीय सहायता तंत्र तैयार होगा।

इसी तरह, ‘डिटेक्ट’ चरण के तहत विद्यार्थियों को ‘कवच क्यूआर कोड’ के माध्यम से एक सुरक्षित माध्यम उपलब्ध कराया जाएगा। विद्यार्थी इस क्यूआर कोड को स्कैन करके तीन प्रमुख विकल्पों के जरिए गुमनाम रूप से अपनी बात रख सकते हैं:

1. ‘मुझे मदद की जरूरत है’ — जब कोई विद्यार्थी स्वयं किसी समस्या का सामना कर रहा हो, तो वह इस विकल्प के माध्यम से सहायता मांग सकता है।

2. ‘मुझे किसी की चिंता है’ — जब कोई विद्यार्थी अपने दोस्त या साथी विद्यार्थी को लेकर चिंतित हो, तो वह इस विकल्प के जरिए अपनी चिंता साझा कर सकता है।

3. ‘मैं कुछ रिपोर्ट करना चाहता हूं’ — इस विकल्प के माध्यम से संदिग्ध नशा तस्करी, उत्पीड़न, परेशान किए जाने, असुरक्षित माहौल या किसी अन्य चिंता के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ‘प्रोटेक्ट’ समय पर सहायता और हस्तक्षेप सुनिश्चित करने से संबंधित है। ‘कवच’ प्रणाली के माध्यम से प्राप्त जानकारी को उचित कार्रवाई के लिए नामित नागरिक एवं पुलिस मेंटर्स के पास भेजा जाएगा।

एसएसपी डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने आगे कहा, “कोई विद्यार्थी पुलिस थाने जाने से हिचकिचा सकता है, लेकिन मदद लेने या किसी मुद्दे की जानकारी गोपनीय रूप से देने के लिए वह आसानी से क्यूआर कोड स्कैन कर सकता है। ‘ऑपरेशन कवच’ का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट है: नशा किसी विद्यार्थी तक पहुंचे, उससे पहले ‘कवच’ को उस विद्यार्थी तक पहुंचाना है।”

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय), खन्ना, हरपिंदर कौर गिल; पुलिस अधीक्षक (जांच), खन्ना, राकेश कुमार यादव; कॉलेज प्रबंधन, संकाय सदस्य, विद्यार्थी तथा ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के जिला एवं तीन विधानसभा क्षेत्रों के समन्वयक भी उपस्थित थे।